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Wednesday, July 8, 2026

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Himachal: पति-पत्नी की एक साथ उठीं अर्थियां…मैहतपुर में मची चीख-पुकार, 4 माह पहले हुई थी शादी

ऑनलाइन न्यूज नेटवर्क (ONN)

ऊना जिले के मैहतपुर में जब जैन परिवार के बेटे और बहू की एक साथ अर्थियां उठीं, तो वहां मौजूद हर शख्स की आंखें छलक पड़ीं। इस हृदय विदारक दृश्य को देखकर पूरा क्षेत्र गहरे शोक में डूब गया। मोहाली के भारतमाला हाईवे पर हुए एक भीषण सड़क हादसे में मौत का ग्रास बने इस युवा दंपति की इसी साल मार्च में ही शादी हुई थी। दोनों की एक साथ हुई मौत ने न केवल परिवार को बल्कि पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है।

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जानकारी के अनुसार मैहतपुर के जाने-माने उद्योगपति शम्मी जैन के पुत्र प्रत्युष जैन कनाडा में रहते थे और कुछ समय पहले ही वह अपने वतन भारत लौटे थे। भारत लौटने के बाद मार्च महीने में उनकी शादी हर्षिता जैन के साथ बड़े अरमानों से की गई थी, लेकिन विधाता को कुछ और ही मंजूर था। भाग्य की विडंबना देखिए कि यह नवविवाहित जोड़ा एक समारोह से वापस लौट रहा था, तभी मोहाली में भारतमाला हाईवे पर उनकी गाड़ी एक जबरदस्त सड़क हादसे का शिकार हो गई। इस सफर में उनकी गाड़ी में एडवोकेट सुरेश ऐरी भी मौजूद थे। हादसा इतना भयानक था कि प्रत्युष, हर्षिता और एडवोकेट सुरेश ऐरी तीनों की मौके पर ही मौत हो गई।

पोस्टमार्टम की प्रक्रिया के बाद जब प्रत्युष और हर्षिता की पार्थिव देह एक साथ मैहतपुर स्थित उनके घर पहुंची, तो वहां चीख-पुकार मच गई। परिजनों का क्रंदन और विलाप इतना मार्मिक था कि वहां मौजूद सैंकड़ों लोगों की आंखों से आंसुओं की धारा बह निकली। उनके निवास स्थान से भभौर स्थित श्मशानघाट के लिए जब दोनों की शव यात्रा एक साथ निकली तो सैंकड़ों की संख्या में गमगीन लोग भारी मन से उनके साथ चले। भभौर में दोनों को एक साथ मुखाग्नि देकर नम आंखों से अंतिम विदाई दी गई। इस दुखद घड़ी में शोक संतप्त परिवार को सांत्वना देने के लिए ऊना के विधायक सतपाल सिंह सत्ती, पूर्व विधायक ओपी रतन सहित कई सामाजिक, धार्मिक और राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि भी मौजूद रहे।

वहीं, इस खौफनाक हादसे में काल का ग्रास बने तीसरे व्यक्ति एडवोकेट सुरेश ऐरी को वीरवार को अंतिम विदाई दी जाएगी। मिली जानकारी के मुताबिक एडवोकेट ऐरी के बेटे कनाडा में रहते हैं। वर्तमान में उनके बेटे के कनाडा से भारत पहुंचने का इंतजार किया जा रहा है, ताकि उनके आने के बाद ही अंतिम संस्कार की सभी हिंदू रस्में पूरी की जा सकें।

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