एक महीने पहले SDM को ज्ञापन, फिर भी कार्रवाई नहीं—बागरण चौक पर 25 वर्षीय युवक की मौत के बाद प्रशासन घेरे में
पांवटा साहिब। बागरण चौक पर बीती रात करीब 12 बजे तेज रफ्तार लोडेड ट्राले की चपेट में आने से 25 वर्षीय बाइक सवार युवक की दर्दनाक मौत हो गई। बाइक पर उसके साथ सवार दूसरे व्यक्ति को गंभीर हालत में उच्च चिकित्सा केंद्र, नाहन रेफर किया गया है।
भाजपा युवा मोर्चा मंडल पांवटा साहिब के अध्यक्ष संयम गुप्ता ने कहा कि यह हादसा केवल एक सड़क दुर्घटना नहीं है, बल्कि प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। सबसे गंभीर बात यह है कि करीब एक महीने पहले ही ट्रालों की निर्धारित गति सीमा और तेज रफ्तार को लेकर SDM महोदय को ज्ञापन सौंपकर प्रशासन को इस समस्या से अवगत करवाया गया था। इसके बावजूद आज तक इस दिशा में कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई।
संयम गुप्ता ने कहा कि नगर परिषद क्षेत्र में ट्रालों के लिए 40 किलोमीटर प्रति घंटा की निर्धारित गति सीमा है, लेकिन इसके बावजूद भारी ट्राले इससे कहीं अधिक रफ्तार से दौड़ते नजर आते हैं। यदि प्रशासन ने एक महीने पहले दिए गए ज्ञापन पर गंभीरता से कार्रवाई की होती और ट्रालों की स्पीड पर प्रभावी निगरानी रखी होती, तो शायद आज बागरण चौक पर एक 25 वर्षीय युवक की जान नहीं जाती।
उन्होंने कहा कि जब प्रशासन को पहले ही तेज रफ्तार ट्रालों से पैदा हो रहे खतरे की जानकारी दे दी गई थी, तो कार्रवाई क्यों नहीं हुई? 40 किमी/घंटा की निर्धारित गति सीमा लागू करवाने के लिए प्रशासन ने अब तक क्या कदम उठाए?
उन्होंने कहा कि भारी ट्रालों का अधिकृत रूट NH है, लेकिन शॉर्टकट के चक्कर में ये ट्राले पुरुवाला–बद्रीपुर मार्ग से लगातार गुजर रहे हैं। यह स्थानीय गांवों को जोड़ने वाली सड़क है। इस मार्ग पर तेज रफ्तार भारी वाहनों की आवाजाही आम जनता के लिए लगातार खतरा बनती जा रही है।
संयम गुप्ता ने प्रशासन से मांग की कि बागरण चौक हादसे को गंभीरता से लेते हुए 40 किमी/घंटा की गति सीमा को सख्ती से लागू किया जाए, नियमित स्पीड चेकिंग की जाए, तेज रफ्तार ट्रालों पर कड़ी कार्रवाई की जाए और पुरुवाला–बद्रीपुर मार्ग पर अनावश्यक भारी वाहनों की आवाजाही पर रोक लगाई जाए।
उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि अब भी प्रशासन ने ठोस कार्रवाई नहीं की और जनता को मजबूर होकर सड़कों पर उतरकर चक्का जाम करना पड़ा, तो इसकी पूर्ण जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।
संयम गुप्ता ने कहा, “हादसे के बाद संवेदना नहीं, हादसे से पहले कार्रवाई चाहिए। अब प्रशासन को तय करना होगा कि वह और कितनी जानें जाने का इंतजार करेगा।”

