ऑनलाइन न्यूज नेटवर्क (ONN)
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार देवगुरु बृहस्पति 15 जुलाई यानी बुधवार से अस्त हो रहे हैं। ऐसे में विवाह, मुंडन संस्कार, गृह प्रवेश, यज्ञोपवीत समेत अन्य मांगलिक एवं शुभ कार्यों पर विराम लग जाएगा। सनातन परंपरा में देवगुरु वृहस्पति को शुभता, ज्ञान, धर्म और वैवाहिक जीवन में सुख का कारक ग्रह माना गया है। इनके अस्त रहने की अवधि में शुभ कार्यों का आयोजन एवं निर्धारण करना उचित नहीं माना जाता है।

हिमाचल प्रदेश के ऊना में सिद्धिदात्री मंदिर के मुख्य पुजारी पंडित शशि भूषण ने बताया कि देवगुरु वृहस्पति बुधवार शाम 07:27 बजे अस्त होंगे, जो 25 दिन बाद नौ अगस्त को शाम 09: 54 बजे उदय होंगे।
उन्होंने बताया कि ज्योतिष शास्त्र के अनुसार उत्तर भारत में देवगुरु वृहस्पति और गुरु शुक्र के अस्त होने पर विवाह समेत मांगलिक कार्य वर्जित रहते हैं। उन्होंने बताया कि ये दोनों गुरु एक साथ अस्त नहीं होते हैं। बुधवार से सिर्फ देवगुरु वृहस्पति अस्त होंगे। लेकिन एक गुरु की भी अनुपस्थिति विवाह के लिए शुभ नहीं मानी जाती है।
ये कार्य कर सकेंगे
इस दौरान लोग नियमित पूजा-पाठ, निर्धारित कार्य, ग्रह शांति कार्य कर सकते हैं। अगर कोई जातक किसी ग्रह के प्रभाव से जूझ रहा है तो उसका निवारण कार्य आदि किया जा सकता है। इसके साथ ही दान करने पर भी रोक नहीं होती।
उन्होंने बताया कि देवगुरु वृहस्पति शयन अवस्था में चले जाएंगे। इस दौरान वृहस्पति ग्रह संबंधी पूजा-पाठ, ग्रह शांति कार्य बंधित रहेंगे।

