ऑनलाइन न्यूज़ नेटवर्क (ONN)
25 जून 1975 का दिन भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में एक काले अध्याय के रूप में दर्ज है। इसी दिन तत्कालीन केंद्र सरकार द्वारा देश में आपातकाल लागू किया गया, जिसने संविधान द्वारा प्रदत्त नागरिक स्वतंत्रताओं और लोकतांत्रिक मूल्यों को गंभीर आघात पहुंचाया। मीडिया में जारी व्यान में भाजपा मंडल महामंत्री व जिला परिषद सदस्य रोहित चौधरी ने बताया कि लगभग 21 महीनों तक चले इस दौर में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर अंकुश लगाया गया, प्रेस पर सेंसरशिप लागू की गई, हजारों राजनीतिक कार्यकर्ताओं और विपक्षी नेताओं को बिना मुकदमे के जेलों में बंद कर दिया गया तथा लोकतांत्रिक विरोध के सभी माध्यमों को दबाने का प्रयास किया गया।
उन्होंने कहा कि भारत विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र है और इसकी सबसे बड़ी शक्ति जनता की आवाज, स्वतंत्र न्यायपालिका, स्वतंत्र मीडिया तथा मजबूत लोकतांत्रिक संस्थाएं हैं। आपातकाल के दौरान इन संस्थाओं को कमजोर करने का प्रयास किया गया, लेकिन देश के लोकतंत्र प्रेमी नागरिकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और लोकतंत्र सेनानियों ने संघर्ष का मार्ग चुना और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया।
रोहित चौधरी ने बताया कि 25 जून केवल अतीत की एक घटना को स्मरण करने का दिन नहीं है, बल्कि यह लोकतंत्र की रक्षा और संविधान के प्रति हमारी प्रतिबद्धता को दोहराने का अवसर भी है। यह दिन हमें याद दिलाता है कि सत्ता चाहे कितनी भी शक्तिशाली क्यों न हो, लोकतंत्र में अंतिम शक्ति जनता के पास होती है। लोकतंत्र की मजबूती के लिए जागरूक नागरिक, स्वतंत्र विचार और संविधान के प्रति सम्मान अत्यंत आवश्यक हैं।
उन्होंने कहा कि आज हम उन सभी लोकतंत्र सेनानियों को श्रद्धापूर्वक नमन करते हैं, जिन्होंने आपातकाल के दौरान संघर्ष किया, यातनाएं सहीं और लोकतंत्र की पुनर्स्थापना के लिए अपना अमूल्य योगदान दिया। उनका त्याग आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत है।
हम सभी का दायित्व है कि लोकतांत्रिक मूल्यों, संविधान की गरिमा और राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखते हुए एक सशक्त, समृद्ध और लोकतांत्रिक भारत के निर्माण का संकल्प लें।

