ऑनलाइन न्यूज नेटवर्क (ONN)
हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में स्थित डॉ. राजेंद्र प्रसाद मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल टांडा ने स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है. यहां विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम ने हिमाचल प्रदेश का पहला रोबोटिक किडनी ट्रांसप्लांट सफलतापूर्वक कर इतिहास रच दिया.
इस उपलब्धि पर मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. मिलाप शर्मा ने कहा, ‘यह सफलता न केवल संस्थान बल्कि पूरे हिमाचल के लिए गर्व की बात है. रोबोटिक किडनी ट्रांसप्लांट के साथ टांडा अब अत्याधुनिक चिकित्सा सेवाओं के क्षेत्र में अग्रणी संस्थान के रूप में उभरकर सामने आया है. यह उपलब्धि साबित करती है कि अब प्रदेश के मरीजों को जटिल इलाज के लिए बाहर जाने की आवश्यकता कम होगी और उन्हें बेहतर सुविधाएं अपने ही राज्य में मिल सकेंगी’.
इस सफल सर्जरी में कुल्लू निवासी 42 वर्षीय अजय को उनकी पत्नी लवली ने किडनी दान कर नई जिंदगी दी. चार वर्षों से किडनी रोग से जूझ रहे अजय पहले डायलिसिस पर निर्भर थे. हालत गंभीर होने पर उन्होंने पीजीआई चंडीगढ़ और मैक्स अस्पताल तक इलाज के लिए दौड़ लगाई, लेकिन अंततः टांडा मेडिकल कॉलेज में उन्हें राहत और उम्मीद मिली.
रोबोटिक तकनीक से हुआ जटिल ऑपरेशन
नेफ्रोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. अभिनव राणा के नेतृत्व में मरीज की विस्तृत जांच के बाद रोबोटिक तकनीक से ट्रांसप्लांट का निर्णय लिया गया. किडनी ट्रांसप्लांट विशेषज्ञ डॉ. अमित शर्मा और सर्जरी विभाग की टीम ने इस अत्याधुनिक सर्जरी को अंजाम दिया. ऑपरेशन रात 10 बजे तक चला और इसके बाद पति-पत्नी को आईसीयू में शिफ्ट किया गया, जहां दोनों की हालत स्थिर बनी हुई है.
इस जटिल सर्जरी में नेफ्रोलॉजी, किडनी ट्रांसप्लांट, सर्जरी और एनेस्थीसिया विभाग के विशेषज्ञ शामिल रहे. सर्जरी टीम में डॉ. सोमराज महाजन, डॉ. आशीष शर्मा, डॉ. दीपेश, डॉ. कुशल, डॉ. दिव्यम, डॉ. साक्षी और डॉ. हर्षिता का अहम योगदान रहा. एनेस्थीसिया टीम का नेतृत्व डॉ. ननीश ने किया, जबकि पूरी प्रक्रिया का समन्वय ट्रांसप्लांट कोऑर्डिनेटर नीरज जम्वाल और कल्पना शर्मा ने संभाला.
लगातार बढ़ रही विशेषज्ञता
टांडा मेडिकल कॉलेज में यह 23वां किडनी ट्रांसप्लांट है, लेकिन पहली बार रोबोटिक तकनीक का इस्तेमाल किया गया है. इससे संस्थान की उन्नत चिकित्सा क्षमताओं को नई पहचान मिली है. संस्थान में 30 करोड़ रुपये का रोबोटिक सर्जरी सेंटर 12 सितंबर 2025 को मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू द्वारा चंडीगढ़ से वर्चुअली उद्घाटित किया गया था. शिमला के चमियाणा के बाद टांडा प्रदेश का दूसरा ऐसा सरकारी अस्पताल है, जहां यह अत्याधुनिक सुविधा उपलब्ध है.

