ऑनलाइन न्यूज नेटवर्क (ONN)
हिमाचल प्रदेश के चम्बा जिले के उपमंडल चुराह की बेटी काजल ठाकुर ने भारतीय सेना में लैफ्टिनेंट के पद पर नियुक्ति पाकर न केवल अपने परिवार बल्कि पूरे चुराह घाटी और प्रदेश का नाम गौरवान्वित किया है। वह चुराह घाटी की पहली ऐसी बेटी बन गई हैं, जिन्होंने सेना में अधिकारी बनकर एक नई मिसाल कायम की है। काजल ठाकुर चुराह क्षेत्र की भंजराड़ू पंचायत के गांव डिकरीयूंड की रहने वाली हैं। कोलकाता में आयोजित एक गरिमामय पासिंग आऊट परेड के दौरान भारतीय सेना में लैफ्टिनैंट के पद पर नियुक्त किया गया। इस भावुक और गौरवपूर्ण क्षण में काजल के माता-पिता स्वयं उपस्थित थे। जब काजल के कंधों पर सितारों वाली वर्दी सजी तो गर्व से परिजनों की आंखें छलक उठीं।
शिक्षक के घर पली, मेहनत से पाया मुकाम
काजल ठाकुर का सफर अनुशासन और शिक्षा से भरपूर रहा है। उनके पिता जेबीटी शिक्षक हैं और माता गृहिणी हैं। बचपन से ही सेना में जाने का सपना संजोने वाली काजल ने इसे साकार करने के लिए कड़ी मेहनत की। उनकी प्रारंभिक शिक्षा सरस्वती विद्या मंदिर भंजराड़ू से हुई, जबकि माध्यमिक शिक्षा जेआरटी मैमोरियल स्कूल भंजराड़ू से पूरी की। इसके बाद उन्होंने डीएवी बनीखेत से उच्च शिक्षा प्राप्त की। अपनी लगन के दम पर उन्होंने मिलिटरी नर्सिंग सर्विस की परीक्षा पास की और 4 वर्षों के कठिन प्रशिक्षण के बाद आज वह भारतीय सेना की अधिकारी बनी हैं।
आकांक्षी क्षेत्र के लिए प्रेरणा बनी काजल
दुर्गम और संसाधनों की कमी वाले चुराह जैसे आकांक्षी क्षेत्र से निकलकर सेना में अधिकारी बनना काजल की दृढ़ इच्छाशक्ति को दर्शाता है। उनकी यह उपलब्धि इस बात का प्रमाण है कि सीमित संसाधनों के बावजूद अगर लक्ष्य स्पष्ट हो, तो उसे हासिल किया जा सकता है। आज काजल न केवल एक सैन्य अधिकारी हैं, बल्कि उन हजारों पहाड़ी लड़कियों के लिए प्रेरणास्रोत बन गई हैं जो देश सेवा का सपना देखती हैं। उनकी सफलता संदेश देती है कि पहाड़ों की बेटियां अब हर क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को छू रही हैं और किसी से कम नहीं हैं। पूरे क्षेत्र में काजल की इस उपलब्धि पर जश्न का माहौल है और उन्हें बधाई देने वालों का तांता लगा है।

