निशानदेही की ताजा रिपोर्ट में अवैध निर्माण का कोई जिक्र तक नहीं..
ऑनलाइन न्यूज़ नेटवर्क (ONN)
जिला सिरमौर के उपमंडल कफोटा में सरकारी भूमि पर अतिक्रमण के मामले में राजस्व रिकॉर्ड को बदलकर एक खास पक्ष को फायदा पहुंचाने की कोशिश की गई हैं। कमरऊ तहसीलदार (रिटायर्ड) व क्षेत्रीय कानूनगो की भूमिका पर गंभीर आरोप लगे हैं। वर्ष 2024 से पहले जिला राजस्व अधिकारी (DRO), तत्कालीन SDM कफोटा, नायब तहसीलदार कमरऊ सहित पटवारी-कानूनगो सर्कल दुगाना की उपस्थिति में सम्पन्न हुई मौके की निशानदेही को दरकिनार कर अब राजस्व रिकॉर्ड में ऐसी स्थिति तैयार की गई हैं जिसमें कथित तौर पर प्रधान पति को लाभ पहुंचाया जा सकें और उसे अतिक्रमण के एक गम्भीर मामले से बाहर रखा जा सकें।
हैरानी की बात तो यह है कि सरकारी भूमि पर बने अवैध भवन निर्माण को पूरी तरह बचा लिया गया है और उसे मोजा दुगाना से बाहर कर मौजा शिल्ला में बताया गया हैं, जबकि वह अवैध है या नहीं इस बात का निशानदेही रिपोर्ट में कोई जिक्र ही नहीं हैं। जिस कारण मामला सुलटाने की जगह और उलझा दिया गया हैं। यहां तक कि कुछ निजी भूमि मालिक के भवन को भी सरकारी भूमि पर बने होने का टारगेट किया गया हैं।
बता दें कि SDM कफोटा को सौपीं गई एक शिकायत में करीब दो दर्जन स्थानीय लोगों ने बीते कुछ दिन पहले कफोटा बाजार में सरकारी जमीन पर अतिक्रमण की निशानदेही को लेकर तहसीलदार (रिटायर्ड) कमरऊ व कानूनगो की कार्यप्रणाली पर कई सवाल खड़े किये हैं। स्थानीय लोगों ने वर्ष 2024 से पहले की निशानदेही को आधार मानते हुए हाल की निशानदेही रिपोर्ट की जांच और उसे निरस्त करने की मांग की है।
शिकायतकर्ता दलीप सिंह, जगदीश, धनी राम, सोहन, गुलाब सिंह, सुरेश पुंडीर, रतिराम, कमलेश और मुंशी राम सहित अन्य लोगों का आरोप है कि वर्ष 2024 से पहले हुई निशानदेही में मौके की वास्तविक स्थिति, रास्ते और सरकारी भूमि को स्पष्ट किया गया था। उनका कहना है कि अब बाद में रिकॉर्ड में अलग स्थिति दर्शाए जाने से कथित महिला प्रधान के पति को लाभ पहुंच सकता है।
शिकायत में केस नंबर 11071 का हवाला देते हुए कहा गया है कि पूर्व में हुई निशानदेही के आधार पर तहसीलदार निशा आजाद ने मामले में निर्णय दिया था और प्रतिवादी पर जुर्माना भी लगाया गया था। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि बाद की राजस्व रिपोर्ट में तथ्यों को बदलने व सरकारी भूमि पर बनी अवैध दुकानों पर कार्रवाई की पैरवी का प्रयास किया गया हैं। उन्होंने खसरा नंबर 627 का उल्लेख करते हुए कहा है कि मौके पर रास्ता मलकियत भूमि में है, जबकि प्रतिवादी के मकान, रास्ते और कुछ हिस्सा हिमाचल सरकार की भूमि में आता है।
शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया कि राजनीतिक दबाव के चलते हाल की निशानदेही रिपोर्ट में स्थिति अलग दिशा में दर्शाई गई है। इससे रास्ते को लेकर क्षेत्र में तनाव पैदा हो गया है। शिकायत में आशंका जताई गई है कि विवाद बढ़ने पर जान-माल का नुकसान हो सकता है। उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में जिम्मेदारी राजस्व विभाग की होगी।
उधर, कफोटा एसडीएम का कार्यभार देख रहे एसडीएम शिलाई जसपाल सिंह ने बताया कि कफोटा में कथित अवैध कब्जे को लेकर हुई निशानदेही संबंधी शिकायत उन्हें प्राप्त हुई है।

