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Sunday, July 26, 2026

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”मम्मी-पापा अपना ख्याल रखना”, कहकर दुनिया छोड़ गया इकलौता बेटा; परिजनों ने यूनिवर्सिटी प्रबंधन पर लगाए ये आरोप

ऑनलाइन न्यूज नेटवर्क (ONN)

हिमाचल प्रदेश के सोलन स्थित शूलिनी विश्वविद्यालय के एक पूर्व छात्र की आत्महत्या के मामले ने अब तूल पकड़ लिया है। मृतक के परिजनों ने विश्वविद्यालय प्रबंधन और एक महिला फैकल्टी पर मानसिक प्रताड़ना और जॉब प्लेसमेंट के नाम पर धोखाधड़ी के गंभीर आरोप लगाए हैं। युवक ने फंदा लगाने से ठीक पहले अपने माता-पिता को फोन कर अंतिम विदाई दी थी, जिसके बाद से पूरे क्षेत्र में शोक और रोष का माहौल है।

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सुसाइड नोट में ‘मैम’ का जिक्र और प्रताड़ना के आरोप

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दरअसल, नितिन के दाह संस्कार के बाद बुधवार को घर पर आयोजित शुद्धि संस्कार के दौरान उसके माता-पिता का दर्द छलक पड़ा। उन्होंने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय द्वारा प्लेसमेंट के नाम पर किए गए धोखे और कैंपस में हुई प्रताड़ना ने उनके बेटे को जान देने पर मजबूर कर दिया। मृतक नितिन के पिता कल्याण सिंह चौहान ने बताया कि उनके बेटे ने सुसाइड नोट में अपनी आपबीती लिखी है। परिजनों का दावा है कि विश्वविद्यालय में ‘अवनी’ नाम की एक मैम नितिन को लगातार मानसिक रूप से प्रताड़ित कर रही थी। सुसाइड नोट में भी इसका उल्लेख किया गया है।

परिजनों ने लगाए ये आरोप

नितिन की माता प्रोमिला चौहान ने बताया कि उनका बेटा अक्सर फोन पर अवनी मैम द्वारा दी जा रही परेशानी का जिक्र करता था। उन्होंने नितिन को पढ़ाई छोड़ घर लौटने को भी कहा था, लेकिन वह स्वावलंबी बनना चाहता था। परिजनों ने विश्वविद्यालय के प्लेसमेंट सेल पर गंभीर सवाल उठाए हैं। नितिन को ₹50,000 प्रति माह के पैकेज का वादा कर एक कंपनी में भेजा गया था, लेकिन वहां उसे मात्र ₹25,000 वेतन दिया गया। आरोप है कि एमबीए के छात्र से कंपनी में साफ-सफाई और पोछा लगवाया जाता था। उससे देर रात 2:30 बजे तक काम लेकर मानसिक दबाव बनाया गया। जब नितिन ने इस शोषण के खिलाफ विश्वविद्यालय प्रबंधन से मदद मांगी, तो उसे वहां भी राहत मिलने के बजाय प्रताड़ित किया गया।

हमने घर का इकलौता चिराग खो दिया’

नितिन के पिता ने भावुक होते हुए कहा कि उन्होंने अपने घर का इकलौता चिराग खो दिया है। वे अब इस मामले की उच्च स्तरीय और निष्पक्ष जांच चाहते हैं ताकि भविष्य में किसी अन्य छात्र को ऐसे हालात का सामना न करना पड़े। बुधवार को शुद्धि संस्कार के दौरान विश्वविद्यालय प्रबंधन के करीब आठ प्रतिनिधि भी नितिन के घर पहुंचे थे, जहां उन्हें परिजनों के कड़े विरोध और सवालों का सामना करना पड़ा।

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