ऑनलाइन न्यूज नेटवर्क (ONN)
पहाड़ों में आमतौर पर फरवरी का मतलब ठंडी सुबह, बर्फीली हवाएं और बादलों की आवाजाही होता है, लेकिन इस बार तस्वीर कुछ और ही है। हिमाचल में सर्दियों का आख़िरी महीना आते-आते मौसम ने ऐसा मोड़ लिया है कि धूप तेज़ है, तापमान ऊपर जा रहा है और बारिश-बर्फबारी की कमी साफ़ महसूस की जा रही है। यही वजह है कि विंटर सीजन इस बार सवालों के घेरे में खड़ा नजर आ रहा है।
सर्दियों में कम बरसे बादल
भारत मौसम विज्ञान विभाग के आंकड़ों के मुताबिक 1 जनवरी से 15 फरवरी के बीच हिमाचल प्रदेश में सामान्य से करीब 24 प्रतिशत कम बारिश और बर्फबारी रिकॉर्ड की गई है। आमतौर पर इस अवधि में प्रदेश में औसतन 134.9 मिलीमीटर वर्षा होती है, लेकिन इस बार यह आंकड़ा 101.9 मिलीमीटर पर ही सिमट गया।
मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि सर्दियों में इस तरह की कमी आने वाले महीनों में जल स्रोतों और तापमान दोनों पर असर डाल सकती है।
मौसम का मिजाज फिलहाल बदलने वाला नहीं दिख रहा। अगले एक सप्ताह तक प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में अच्छी बारिश या बर्फबारी के संकेत नहीं हैं। हालांकि एक पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय हो रहा है, लेकिन उसका असर सीमित रहने की संभावना जताई गई है।
17 और 18 फरवरी को चंबा, किन्नौर और लाहौल-स्पीति के ऊंचाई वाले इलाकों में हल्की बारिश और बर्फबारी हो सकती है, जबकि बाकी जिलों में मौसम साफ बना रहेगा। 19 फरवरी से पूरे प्रदेश में फिर से साफ मौसम रहने का अनुमान है।
दिन के तापमान में तेज उछाल
बारिश-बर्फबारी की कमी का सीधा असर तापमान पर दिख रहा है। प्रदेश का औसत अधिकतम तापमान सामान्य से करीब 4.8 डिग्री सेल्सियस अधिक चल रहा है। कल्पा में सबसे ज्यादा उछाल देखा गया, जहां अधिकतम तापमान सामान्य से 7.5 डिग्री ऊपर पहुंचकर 14.1 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।
कांगड़ा में पारा 6.9 डिग्री बढ़कर 25 डिग्री तक पहुंच गया, मनाली में 6 डिग्री की बढ़ोतरी के साथ तापमान 17.9 डिग्री और शिमला में 4.8 डिग्री अधिक के साथ 18.1 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। भुंतर में भी तापमान सामान्य से 6.7 डिग्री ज्यादा बढ़कर 24.7 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया।
रातें भी ठंडी नहीं रहीं
सिर्फ दिन ही नहीं, रात का तापमान भी सामान्य से ऊपर बना हुआ है। शिमला में न्यूनतम तापमान 3.7 डिग्री अधिक होकर 8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। ऊना में न्यूनतम तापमान 8.4 डिग्री, मनाली में 2.7 डिग्री और भुंतर में 5.5 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड हुआ, जो सभी सामान्य से अधिक हैं।
फरवरी के मध्य में ही गर्मी का अहसास होना कई सवाल खड़े कर रहा है। मौसम विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर यही स्थिति बनी रही तो आने वाले दिनों में मौसम और शुष्क हो सकता है। इसका असर फसलों, जल स्रोतों और पहाड़ी इलाकों की प्राकृतिक जलवायु पर भी पड़ सकता है।
