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Tuesday, April 21, 2026

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शिवरात्रि पर मातम: झंडा चढ़ाते करंट की चपेट में आए 3 युवक, एक ने तोड़ा दम

ऑनलाइन न्यूज नेटवर्क (ONN)

हिमाचल प्रदेश में जहां एक ओर शिवरात्रि के पावन दिन गांवों में भक्ति और उल्लास का माहौल थाए वहीं सोलन जिला के नालागढ़ के एक गांव में खुशियां पल भर में मातम में बदल गईं। धार्मिक आस्था के बीच हुई एक चूक ने एक परिवार का सहारा छीन लिया और दो युवकों को जिंदगी की जंग में धकेल दिया।

दरअसल नालागढ़ क्षेत्र की बैरछा पंचायत के खनोवा गांव में रविवार को नगर खेड़ा स्थापना दिवस के अवसर पर भंडारे और झंडा चढ़ाने की रस्म चल रही थी। ग्रामीण पूरे श्रद्धाभाव से पुराने झंडे को उतारकर नया ध्वज स्थापित करने की तैयारी में जुटे थे। इसी दौरान एक लोहे की लंबी पाइप से झंडा बदलने का प्रयास किया जा रहा था। अचानक वह पाइप ऊपर से गुजर रही हाई टेंशन बिजली लाइन से छू गई। देखते ही देखते तेज करंट लोहे की पाइप में दौड़ गया और पास खड़े तीन लोग उसकी चपेट में आ गए।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार करंट इतना तेज था कि तीनों युवक मौके पर ही बेहोश होकर गिर पड़े। गांव में चीख-पुकार मच गई। लोग बदहवासी में उन्हें बचाने के लिए दौड़े। घायलों की पहचान हरि सिंह (45) पुत्र माड़ू राम, हरि सिंह पुत्र लेखराज और अवतार सिंह पुत्र मेहर चंद के रूप में हुई है। तीनों को तत्काल पास के निजी अस्पताल पहुंचाया गया।

हरि सिंह की हालत गंभीर देखते हुए उसे तुरंत बिलासपुर स्थित एम्स रेफर किया गया। बैरछा पंचायत के पूर्व प्रधान जोगिंद्र सिंह जिंदू स्वयं उन्हें अपनी कार से अस्पताल लेकर गए, लेकिन वहां पहुंचने पर चिकित्सकों ने हरि सिंह को मृत घोषित कर दिया।

एक घर का सहारा छिन गया

शिवरात्रि के दिन जहां लोग भगवान शिव से सुख-समृद्धि की कामना कर रहे थे, वहीं हरि सिंह के घर में मातम पसरा है। परिवार के लिए वह एक मजबूत सहारा थे। उनकी असमय मौत ने पत्नी, बच्चों और बुजुर्ग परिजनों को गहरे सदमे में डाल दिया है। गांव में भी शोक की लहर है। धार्मिक आयोजन की खुशी एक दर्दनाक हादसे में बदल गई। दो अन्य युवक अभी भी गंभीर हालत में उपचाराधीन हैं।

एएसपी अशोक वर्मा ने बताया कि शव को पोस्टमार्टम के लिए नालागढ़ अस्पताल लाया जा रहा है और पुलिस मामले की जांच कर रही है। प्रारंभिक तौर पर हादसे का कारण हाई टेंशन लाइन से पाइप का संपर्क होना माना जा रहा है। यह घटना एक कड़वी सीख छोड़ गई है, धार्मिक आयोजनों में भी सुरक्षा मानकों की अनदेखी भारी पड़ सकती है। शिवरात्रि के पावन दिन खनोवा गांव में जो दीपक श्रद्धा से जल रहे थे, उनमें से एक घर का चिराग हमेशा के लिए बुझ गया।

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