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Sunday, September 13, 2026

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हिमाचल में मानसून का कहर, 74 दिनों में 296 लोगों की मौत….नुकसान ₹1661 करोड़ के पार

ऑनलाइन न्यूज नेटवर्क (ONN)

स्टेट इमरजेंसी ऑपरेशन्स सेंटर (SEOC) की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, हिमाचल सरकार को 2026 के मॉनसून सीजन के दौरान कुल ₹1,661.97 करोड़ का नुकसान हुआ है। इसमें पब्लिक वर्क्स डिपार्टमेंट (PWD) को ₹1,231.59 करोड़ का नुकसान हुआ है।

30 जून से 11 सितंबर तक की 74 दिनों की अवधि में आपदा के कुल आकलन से राज्य भर में भारी बारिश, भूस्खलन, अचानक बाढ़ और मौसम से जुड़ी अन्य घटनाओं के व्यापक असर का पता चला है। इस दौरान 296 लोगों की मौत हुई, जिनमें से 119 मौतें सीधे तौर पर प्राकृतिक आपदाओं और मौसम से जुड़ी घटनाओं के कारण हुईं, जबकि 177 लोगों की मौत सड़क दुर्घटनाओं में हुई। कुल 520 लोग घायल हुए। आधिकारिक आकलन के अनुसार, इन आपदाओं में 521 पालतू जानवरों और 521 पोल्ट्री पक्षियों की भी मौत हुई। PWD सबसे ज़्यादा प्रभावित विभाग रहा। SEOC ने इसके नुकसान का आंकड़ा ₹1,231.59 करोड़ बताया है, जो सरकार को हुए कुल नुकसान का लगभग तीन-चौथाई हिस्सा है।

बिजली विभाग दूसरा सबसे ज़्यादा प्रभावित विभाग रहा, SEOC ने नुकसान का अनुमान 36,868.06 लाख रुपये (368.68 करोड़ रुपये) लगाया है। कृषि विभाग ने 2,150 लाख रुपये और बागवानी विभाग ने 1,227.27 लाख रुपये के नुकसान की जानकारी दी। ग्रामीण विकास विभाग ने 991.94 लाख रुपये और पशुपालन विभाग ने 214.20 लाख रुपये के नुकसान की रिपोर्ट दी। अन्य नुकसानों में अनुग्रह राशि के तौर पर 135.60 लाख रुपये, मत्स्य पालन विभाग में 58.90 लाख रुपये, शहरी विकास में 49.70 लाख रुपये, उच्च शिक्षा में 15.37 लाख रुपये और प्रारंभिक शिक्षा में 142.38 लाख रुपये शामिल हैं। अन्य सार्वजनिक नुकसान और निजी संपत्ति को हुए नुकसान का आकलन 470 लाख रुपये किया गया।

वहीं, पूरे राज्य में बारिश का असर जारी रहा और 12 सितंबर की सुबह तक 67 सड़कें बंद थीं। सबसे ज़्यादा 36 सड़कें मंडी में बंद थीं, इसके बाद कुल्लू में 11 और कांगड़ा में 10 सड़कें बंद थीं। 142 डिस्ट्रीब्यूशन ट्रांसफॉर्मर क्षेत्रों (DTRs) में बिजली आपूर्ति बाधित हुई। सबसे ज़्यादा 92 प्रभावित ट्रांसफॉर्मर मंडी में थे, इसके बाद शिमला में 34 और कुल्लू में 16 ट्रांसफॉर्मर प्रभावित हुए। राज्य में कहीं भी जलापूर्ति योजनाओं में कोई रुकावट नहीं आई। सिंह ने कहा कि खराब सड़कों की मरम्मत का काम चल रहा है और सरकार मॉनसून खत्म होने के बाद बड़े पैमाने पर सड़कों की सतह को ठीक करने (सरफेसिंग) की तैयारी भी कर रही है।

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