ऑनलाइन न्यूज नेटवर्क (ONN)
जिंदगी पलभर क्या से क्या मोड़ प्ले लेती है, इसकी दास्तां उपमंडल चुराह के तहत बैरागढ़-चंबा मार्ग पर हुए एक भीषण सड़क हादसे में देखने को मिली। मानसून ब्रेक के चलते स्कूलों की छुट्टियों का आनंद लेने ननिहाल जा रहीं 4 बच्चियों की दुनिया ही उजड़ गई। चंलूज के पास बस हादसे ने जहां उनकी मां का आंचल छीन लिया, वहीं चारों बच्चियां घायल हैं और मेडिकल कॉलेज चम्बा में जिंदगी की जंग लड़ रही हैं। नियति के इस दर्दनाक पहलू से हर किसी का भी कलेजा कांप उठेगा।

ननिहाल जा रही थी बच्चियां

जानकारी के मुताबिक, शनिवार की सुबह प्रियंका (5), हरशू (4), काव्या (11) और नेहा (10) पुत्री मोती सिंह अपनी मां नीलम निवासी गांव व डाकघर देवीकोठी, तहसील चुराह, जिला चम्बा के साथ ननिहाल जाने के लिए तैयार हुई थीं। स्कूलों में मानसून ब्रेक था और वे ननिहाल जा रहे थे और काफी खुश थे। पिता काम के सिलसिले में गांव से बाहर थे, इसलिए बच्चों की देखरेख और जिम्मेदारी अकेली मां के कंधों पर थी। सब कुछ सामान्य था। बच्चे सफर को लेकर उत्साहित थे, लेकिन किसे पता था कि घर से चंद कदमों की दूरी पर मौत उनकी मां का इंतजार कर रही है। रास्ते में सड़क हादसे ने इस हंसते-खेलते परिवार को बेरहमी से कुचल दिया। इस भयानक सड़क हादसे में बच्चों की मां की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि मासूम बच्चे गंभीर रूप से घायल हो गए। उन्हें तुरंत अस्पताल में भर्ती करवाया गया, जहां उनका इलाज जारी है, लेकिन इस पूरी घटना का सबसे ज्यादा दिल दहला देने वाला पहलू यह है कि अस्पताल के बिस्तर पर जिंदगी और मौत से जूझ रहे इन बच्चों को अभी तक यह अहसास नहीं है कि उनके सिर से मां का साया हमेशा के लिए उठ चुका है और उन्हें थामने वाला मां का हाथ अब कभी उनके सिर पर नहीं रहेगा।
दर्द जो पीढ़ियों तक रहेगा
वे दर्द से कराहती हुईं बार-बार अपनी मां के बारे में पूछ रही हैं और उन्हें चुप करवाने वाले रिश्तेदारों के पास इन मासूमों के सवालों का कोई जवाब नहीं है। यह हादसा भले ही गिनती के कुछ सैकेंड का रहा हो, लेकिन इसके जख्म इतने गहरे है कि इनका दर्द आने वाली पीढ़ियां तक महसूस करेंगी। कमाने वाले हाथों का छिन जाना, बच्चों के सिर से साया उठना और हंसते-खेलते परिवारों का एक झटके में बिखर जाना, यह सिर्फ एक सड़क दुर्घटना नहीं, बल्कि उन तमाम जिंदगियों पर लंगा एक ऐसा दाग है जो समय के साथ भी शायद ही कभी धुंधला हो सकेगा।
वहीं, एक और अस्पताल के वार्डों में 4 वच्चों का इलाज चल रहा है तो दूसरी तरफ घर पर मां के अंतिम संस्कार की तैयारियां पूरी की जा रही है। यह हादसा सिर्फ, एक सड़क दुर्घटना नहीं है, बल्कि यह उन अभागे वच्चों की कहानी है जो यह भी नहीं जानते कि अब वे कभी अपनी मां की गोद में सिर नहीं रख पाएंगे। एक झटके में वच्चों से उनकी मां का आंचल छिन गया और पिता की गैरमौजूदगी ने इस दर्द को और भी गहरा कर दिया है।

