ऑनलाइन न्यूज नेटवर्क (ONN)
हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले के ज्वालामुखी विधानसभा क्षेत्र की खुंडियां तहसील के दूरस्थ गांव कुआली की बेटी रक्षा राणा ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शानदार प्रदर्शन करते हुए प्रदेश और देश का नाम रोशन किया है. नेपाल के पोखरा स्थित रंगशाला स्टेडियम में 23 से 27 जुलाई तक आयोजित संयुक्त भारतीय खेल फाउंडेशन (SBKF) की अंतरराष्ट्रीय खेल प्रतियोगिता में रक्षा राणा ने 86 किलोग्राम वेटलिफ्टिंग वर्ग में कुल 182 किलोग्राम वजन उठाकर स्वर्ण पदक अपने नाम किया. इस उपलब्धि के बाद उनके गांव से लेकर पूरे हिमाचल में खुशी का माहौल है. रक्षा की सफलता केवल एक पदक की कहानी नहीं, बल्कि संघर्ष, मेहनत और मां के त्याग की मिसाल भी है.

किसान परिवार से निकलकर अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचीं रक्षा

रक्षा राणा का जन्म 8 अगस्त 1996 को कांगड़ा जिले के गांव कुआली में एक साधारण किसान परिवार में हुआ. बचपन में ही उनके सिर से पिता स्वर्गीय लक्ष्मी सिंह का साया उठ गया. उस समय रक्षा की उम्र केवल आठ वर्ष थी. परिवार में पांच भाई-बहन थे और पूरे परिवार की जिम्मेदारी उनकी माता राजो देवी के कंधों पर आ गई. आर्थिक तंगी के बावजूद राजो देवी ने बच्चों की पढ़ाई और उनके सपनों से कभी समझौता नहीं किया. परिवार ने मजदूरी और छोटे-बड़े काम करके बच्चों का भविष्य संवारने की कोशिश की.
रक्षा की शिक्षा का सफर भी आसान नहीं रहा. स्कूल जाने के लिए उन्हें रोज कई किलोमीटर पैदल चलना पड़ता था. बाद में कॉलेज की पढ़ाई के लिए ज्वालामुखी और फिर पीजीडीसीए की पढ़ाई के लिए ऊना तक लंबा सफर तय करना उनकी दिनचर्या बन गई. कठिन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने पढ़ाई जारी रखी और अपने लक्ष्य से कभी पीछे नहीं हटीं.
कबड्डी से वेटलिफ्टिंग तक का सफर
बचपन में रक्षा की रुचि कबड्डी में थी, लेकिन कॉलेज में पूरी टीम नहीं होने के कारण वह उस खेल में आगे नहीं बढ़ सकीं. वर्ष 2016 में राजकीय डिग्री कॉलेज ज्वालामुखी में डीपी डॉ. पवन पटियाल ने उन्हें वेटलिफ्टिंग से परिचित कराया. पहली ही इंटर कॉलेज प्रतियोगिता में रक्षा ने रजत पदक जीतकर अपनी प्रतिभा का परिचय दे दिया. हालांकि बीएससी पूरी होने के बाद पारिवारिक परिस्थितियों के चलते उन्हें कुछ समय के लिए खेल छोड़ना पड़ा, लेकिन चार वर्ष पहले उन्होंने दोबारा वापसी की और उसी फैसले ने उनकी जिंदगी बदल दी.
नौकरी के साथ जारी रखा कठिन अभ्यास
वर्तमान में रक्षा राणा मोहाली स्थित फिटनेस चेन प्रो अल्टिमेट जिम्स में कार्यरत हैं. दिनभर नौकरी करने के बाद वह पर्सनल ट्रेनिंग भी देती हैं और फिर देर रात तक वेटलिफ्टिंग का अभ्यास करती हैं. पिछले चार वर्षों से वह रोजाना कई घंटों तक कठिन मेहनत कर रही हैं. उनके प्रशिक्षक गुरकीरत सिंह और कमलदीप ने भी उनका पूरा साथ दिया. नौकरी के कारण सुबह अभ्यास संभव नहीं होने पर दोनों प्रशिक्षक रात 11 बजे तक उन्हें विशेष प्रशिक्षण देने पहुंचते थे. इसी समर्पण का परिणाम पहले जून 2026 में धर्मशाला में राष्ट्रीय प्रतियोगिता के स्वर्ण पदक और अब नेपाल में अंतरराष्ट्रीय स्वर्ण पदक के रूप में सामने आया.
रक्षा राणा की माता राजो देवी ने कहा, “परिवार ने जीवन में कई कठिन दौर देखे, लेकिन उन्होंने कभी बच्चों का हौसला टूटने नहीं दिया. पति के निधन के बाद आर्थिक संकट जरूर आया, लेकिन उन्होंने हमेशा बच्चों को पढ़ाई और आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया. रक्षा बचपन से ही मेहनती रही है और जो लक्ष्य तय करती है, उसे पूरा करने के लिए दिन-रात एक कर देती है. बेटी की यह उपलब्धि पूरे परिवार के लिए गर्व का पल है और मुझे विश्वास है कि रक्षा भविष्य में भी देश के लिए कई पदक जीतेगी.”
ओलंपिक में देश के लिए पदक जीतना है सपना
रक्षा राणा ने अपनी इस सफलता का श्रेय अपनी मां राजो देवी, दिवंगत पिता, प्रशिक्षकों और परिवार को दिया है. उन्होंने कहा कि उनका अगला लक्ष्य ओलंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व करना और देश के लिए पदक जीतना है. रक्षा ने युवाओं से नशे से दूर रहने, खेलों को अपनाने और पूरी ईमानदारी के साथ अपने सपनों के लिए मेहनत करने की अपील की. उन्होंने कहा कि परिस्थितियां चाहे कितनी भी कठिन क्यों न हों, अगर इरादे मजबूत हों तो हर मंजिल हासिल की जा सकती है.

