ऑनलाइन न्यूज नेटवर्क (ONN)
हिमाचल प्रदेश में जमीन का म्यूटेशन (नामांतरण) करने के बदले दो लाख रुपये की रिश्वत मांगने के आरोप में राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (विजिलेंस) मंडी की टीम ने गुरुवार को मंडी जिले को गोहर में ट्रैप लगाकर दो राजस्व अधिकारियों समेत तीन को गिरफ्तार किया.

विजिलेंस ने पटवारी सहायक को एक लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ पकड़ा. इसके बाद कानूनगो और संबंधित पटवारी को भी हिरासत में ले लिया गया, जिन्हें जांच पड़ताल के बाद गिरफ्तार किया गया. तीनों से पूछताछ की जा रही है.

विजिलेंस के अनुसार शिकायतकर्ता पूर्ण चंद ने आरोप लगाया था कि म्यूटेशन की प्रक्रिया पूरी करने के बदले कानूनगो बंसी लाल और पटवारी अरुण धीमान ने दो लाख रुपये की रिश्वत मांगी थी. आरोप है कि रिश्वत की पहली किस्त लेने के लिए उन्होंने अपने पटवारी सहायक ललित कुमार को भेजा. शिकायत का सत्यापन करने के बाद विजिलेंस टीम ने गोहर में जाल बिछाया और ललित कुमार को एक लाख रुपये की रिश्वत स्वीकार करते ही रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया. कानूनगो बंसी लाल 8 दिन बाद सेवानिवृत्त होने वाले हैं, लेकिन उससे पहले ही रिश्वतखोरी के आरोप में वह विजिलेंस की कार्रवाई की जद में आ गए.
इस मामले में पुलिस थाना राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसवी एंड एसीबी), मंडी में प्राथमिकी दर्ज केर ली है. आरोपियों को शुक्रवार को अदालत में पेश कर पुलिस रिमांड की मांग की जाएगी.
उधर, डीएसपी विजिलेंस प्रियंक गुप्ता ने बताया कि मामले की सभी पहलुओं से जांच की जा रही है. पुलिस रिमांड के दौरान आरोपियों से पूछताछ कर पूरे घटनाक्रम और रिश्वत मांगने से जुड़े तथ्यों की पड़ताल की जाएगी.
दरअसल, जमीन का म्यूटेशन राजस्व विभाग में वो सरकारी प्रक्रिया है, जिसके तहत प्रॉपर्टी के मालिकाना हक को रिकॉर्ड में दर्ज किया जाता है. इसमें जमीन की खरीद-बिक्री, वसीयत को अपने नाम किया जाता है. अहम बात है कि जमीन और प्रॉपर्टी की रजिस्ट्री केवल यह साबित करती है कि आपने जमीन खरीदी है, लेकिन म्यूटेशन से यह सुनिश्चित होता है कि सरकारी रिकॉर्ड में जमीन के असली मालिक आप हैं.

