ऑनलाइन न्यूज नेटवर्क (ONN)
वन विभाग और वन्य प्राणी विभाग की एक अनूठी पहल के तहत, झील के शांत और सुरक्षित वातावरण में 47 कछुओं को पुनर्वासित (रिलीज) किया गया है।
हिमाचल प्रदेश की इकलौती प्राकृतिक और मानवाकार रेणुका झील अब और भी जीवंत हो गई है। वन विभाग और वन्य प्राणी विभाग की एक अनूठी पहल के तहत, झील के शांत और सुरक्षित वातावरण में 47 कछुओं को पुनर्वासित (रिलीज) किया गया है। यह कदम न केवल झील की जैव विविधता को समृद्ध करेगा, बल्कि पर्यटकों के लिए भी विशेष आकर्षण का केंद्र बनेगा। आरएफओ (वन) वैजनाथ दीपक भरमौरिया ने बताया कि बीती 25 मई को पालमपुर के राजपुर गांव से कछुओं की तस्करी के आरोप में एक व्यक्ति की दुकान से इन 47 कछुओं को बरामद किया गया था। मामला अदालत में विचाराधीन होने के कारण सीजेएम पालमपुर के आदेशों पर इन कछुओं को करीब 20 दिन तक चिकित्सकों की निगरानी में रखने और उपचार के बाद रेणुका झील के प्राकृतिक माहौल व शांत वातावरण में सुरक्षित छोड़ा (रिलीज) गया है।
वन विभाग ने रेणुका झील में छोड़े गए इन कछुओं की विशेषताओं को लेकर जानकारी दी है। विभाग के अनुसार कुल 47 कछुओं के बच्चों को यहां छोड़ा गया है। इसमें इंडियन टेंट टर्टल के 39 और इंडियन रूफ टर्टल के 8 बच्चे शामिल हैं। विशेषज्ञों के अनुसार इन प्रजातियों के कछुओं की जीवन प्रत्याशा (आयु) 300 वर्ष तक हो सकती है। यह सफल अभियान न केवल वन विभाग की एक बड़ी कामयाबी है, बल्कि वन्य जीवों के संरक्षण के प्रति प्रशासन की संवेदनशीलता को भी दर्शाता है। अब रेणुका आने वाले पर्यटक झील की लहरों के बीच इन नन्हे मेहमानों को अठखेलियां करते देख सकेंगे। वन्य प्राणी विहार रेणुका के आरएफओ राकेश कुमार ने बताया कि ये प्रजातियां पहले से ही रेणुका झील में मौजूद हैं, इसलिए ये कछुए यहां के वातावरण के साथ सहजता से घुल-मिल जाएंगे।

