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Thursday, June 18, 2026

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हिमाचल में 22 जून तक आंधी-बारिश का अलर्ट, 2 दिन ओलावृष्टि की चेतावनी

ऑनलाइन न्यूज नेटवर्क (ONN)

हिमाचल में प्री-मानसून की बारिश का दौर शुरू हो गया है। राजधानी शिमला में जहां बुधवार को मौसम खराब रहा और राजधानी में दोपहर बाद धुंध छा गई और हल्की बारिश हुई। वहीं प्रदेश के अन्य इलाकों में भी कहीं बादल व बारिश तो कहीं धूप का दौर देखने को मिला। मौसम विभाग ने 22 जून तक प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में गरज व तेज हवाओं और बारिश की चेतावनी जारी की है। वहीं 18 व 19 जून को कुछ स्थानों पर ओलावृष्टि की आशंका को देखते हुए ऑरैंज अलर्ट जारी किया गया है। 18 जून को 5 जिलों चम्बा, कांगड़ा, कुल्लू, मंडी और शिमला और 19 जून को 4 जिलों कांगड़ा, कुल्लू, मंडी और शिमला में आंधी, बारिश, ओलावृष्टि का ऑरैंज अलर्ट जारी किया गया है।

लाहौल-स्पीति व किन्नौर को छोड़कर अन्य जिलों में यैलो अलर्ट रहेगा। विभाग के अनुसार 20, 21 और 22 जून को गरज-चमक और तेज हवाओं का यैलो अलर्ट जारी रहेगा। 23 जून को मौसम अपेक्षाकृत शांत रहने का अनुमान है। मौसम विभाग का कहना है कि दक्षिण पश्चिम मानसून की उत्तरी सीमा लगातार आगे बढ़ रही है। अनुकूल परिस्थितियां बनी रहीं तो मानसून 25 जून के आसपास हिमाचल प्रदेश में दस्तक दे सकता है। सामान्य तौर पर शिमला में मानसून जून के अंतिम सप्ताह में पहुंचता है। फिलहाल किसानों, बागवानों और यात्रियों को मौसम के ताजा पूर्वानुमानों पर नजर रखने की सलाह दी गई है।

कटौला में सबसे अधिक बारिश दर्ज

बीते 24 घंटों के दौरान प्रदेश के कई हिस्सों में बारिश दर्ज की गई। सबसे अधिक 60.1 मिलीमीटर वर्षा कटौला में हुई। इसके अलावा मंडी में 37.2 मिलीमीटर, जोगिंद्रनगर में 16.0 मिलीमीटर, पंडोह में 15.8 मिलीमीटर, बग्गी में 12.0 मिलीमीटर, भुंतर में 8.6 मिलीमीटर, रामपुर में 3.3 मिलीमीटर, कुफरी में 3.0 मिलीमीटर, जोत और गोहर में 2.2 मिलीमीटर, सेऊबाग में 1.8 मिलीमीटर और शिमला में 1.4 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। शिमला, जुब्बड़हट्टी, कांगड़ा, भुंतर, सुंदरनगर और कुफरी में गरज-चमक की गतिविधियां भी रिकॉर्ड की गईं। नेरी में 37 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवा चली।

मौसम के बदले मिजाज ने बढ़ाई बागवानों की चिंता

प्रदेश के कई क्षेत्रों में मौसम के बदले मिजाज और ओलावृष्टि की आशंका ने बागवानों की चिंता बढ़ा दी है। विशेष रूप से सेब, आड़ू, पलम और खुबानी जैसे गुठलीदार फलों के साथ-साथ मौसमी सब्जियों की फसलों को नुक्सान पहुंचने का खतरा मंडरा रहा है।

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