ऑनलाइन न्यूज नेटवर्क (ONN)
प्रतिभा किसी उम्र की मोहताज नहीं होती, और अगर मेहनत सच्ची हो, तो सपने हकीकत में बदलते देर नहीं लगती। हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले से एक बेहद प्रेरणादायक तस्वीर सामने आई है, जहां स्कूल की वर्दी पहने एक छात्रा ने जिले के सबसे बड़े प्रशासनिक पद (डीसी) की कुर्सी संभाली। हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड की 10वीं कक्षा में शानदार प्रदर्शन कर जिला टॉप करने वाली मेधावी छात्रा अलीषा को मंडी जिला प्रशासन ने सम्मानित करते हुए एक दिन का डीसी बनाया।
कोटली के एक निजी स्कूल की होनहार छात्रा अलीषा ने 10वीं की बोर्ड परीक्षा में 99.57 प्रतिशत अंक हासिल कर न सिर्फ मंडी जिले में पहला स्थान पाया है, बल्कि पूरे प्रदेश में अपनी एक खास पहचान बनाई है। उनकी इसी कड़ी मेहनत और मेधा को सलाम करते हुए जिला प्रशासन ने उन्हें एक दिन के लिए उपायुक्त (डीसी) मंडी की जिम्मेदारी सौंपने की यह अनूठी पहल की। कुर्सी पर बैठते ही अलीषा फुल-एक्शन मोड में नजर आईं। उन्होंने जिला प्रशासन के कामकाज को बेहद करीब से समझा। अलीषा ने अधिकारियों के साथ अहम बैठकों में हिस्सा लिया। आम जनता की फरियादें और समस्याएं सुनीं। पंचायत प्रतिनिधियों के शपथ ग्रहण समारोह में भाग लेकर प्रशासनिक ढांचे को समझा। राज्यव्यापी मेगा मॉक ड्रिल के दौरान आपदा प्रबंधन की तैयारियों का जायजा लिया और देखा कि आपात स्थिति में विभिन्न विभाग कैसे तालमेल बिठाकर काम करते हैं।
“आईएएस बनकर देश सेवा करना है मेरा असली सपना”
एक दिन की डीसी बनने के बाद अलीषा की खुशी का ठिकाना नहीं था। उन्होंने इसे सपने के साकार होने जैसा अनुभव बताया। अलीषा ने कहा कि प्रशासनिक कार्यों को इतनी नजदीक से देखने का मौका मिलना मेरे लिए बहुत बड़ी बात है। मेरा सपना भविष्य में असल में आईएएस अधिकारी बनकर समाज और देश की सेवा करना है। इस अनुभव ने मुझे मेरे लक्ष्य के प्रति और ज्यादा गंभीर कर दिया है। उन्होंने युवाओं को प्रेरित करते हुए कहा कि सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता। अपनी खूबियों और कमियों को पहचानकर, अनुशासन और निरंतर मेहनत से कोई भी मुकाम हासिल किया जा सकता है।
प्रतिभाओं को पंख दे रहा प्रशासन: अपूर्व देवगन
मंडी के मौजूदा डीसी अपूर्व देवगन ने इस पहल के बारे में बताया कि इसका मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों को बेहतर एक्सपोजर देना और उन्हें बड़े सपने देखने के लिए प्रेरित करना है। उन्होंने बताया कि पिछले साल भी बोर्ड की टॉपर छात्रा को इसी तरह एक दिन की डीसी बनाया गया था। उन्होंने कहा कि मंडी सहित पूरे प्रदेश में प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है, जरूरत सिर्फ उन्हें सही मार्गदर्शन और अवसर देने की है। इस गौरवपूर्ण पल के दौरान अलीषा की माता और उनकी अध्यापिका भी मौजूद रहीं। बेटी को डीसी की कुर्सी पर बैठा देख उनकी आंखें खुशी से छलक उठीं। मंडी प्रशासन की इस पहल की सोशल मीडिया और स्थानीय लोगों में जमकर तारीफ हो रही है।

