ऑनलाइन न्यूज नेटवर्क (ONN)
हिमाचल प्रदेश में पंचायतीराज संस्थाओं के चुनाव को लेकर सियासी सरगर्मियां चरम पर पहुंच गई हैं. गांव की सरकार बनाने की तैयारियों के बीच संभावित उम्मीदवारों ने अभी से मैदान संभाल लिया है. सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर समर्थकों के जरिए अपने पक्ष में माहौल बनाने, जनसमर्थन जुटाने और राजनीतिक पकड़ मजबूत करने की कवायद तेज हो गई है. पंचायत स्तर से लेकर जिला परिषद तक चुनावी चर्चा हर गांव, चौपाल और राजनीतिक गलियारों में सुनाई देने लगी है.
इस दिन पंचायत चुनाव तारीखों का ऐलान
इसी बीच चुनावी प्रक्रिया का सबसे महत्वपूर्ण चरण भी अब पूरा होने जा रहा है. प्रदेश में कल मतदाता सूची (वोटर लिस्ट) अंतिम रूप से फाइनल कर दी जाएगी. इसके साथ ही चुनाव आयोग की ओर से पंचायतीराज संस्थाओं के चुनाव की तारीखों का ऐलान 27 या 28 अप्रैल को किए जाने की पूरी संभावना जताई जा रही है. तारीखों की घोषणा होते ही पूरे प्रदेश में आदर्श चुनाव संहिता लागू हो जाएगी, जिससे राजनीतिक गतिविधियों पर भी निगरानी और सख्ती बढ़ जाएगी.
गांव डिजिटल प्रचार का असर
तीन स्तरीय पंचायतीराज व्यवस्था में ग्राम पंचायत, पंचायत समिति और जिला परिषद के गठन के लिए इस बार कुल 31,214 सीटों पर चुनाव होने हैं. इन सीटों के लिए हजारों उम्मीदवार अपनी किस्मत आजमाने को तैयार बैठे हैं. गांव की सत्ता तक पहुंचने की इस जंग में स्थानीय समीकरण, जातीय संतुलन, विकास के वादे और व्यक्तिगत जनसंपर्क बड़ी भूमिका निभाने वाले हैं. राजनीतिक दल भले ही पंचायत चुनावों में प्रत्यक्ष रूप से भाग नहीं लेते, लेकिन पर्दे के पीछे उनकी सक्रियता साफ नजर आने लगी है. समर्थित उम्मीदवारों को मजबूत करने, रणनीति बनाने और स्थानीय समीकरण साधने का काम तेजी से चल रहा है.
सोशल मीडिया ने इस बार पंचायत चुनाव की तस्वीर को और भी दिलचस्प बना दिया है. फेसबुक, व्हाट्सऐप और इंस्टाग्राम जैसे प्लेटफॉर्म पर उम्मीदवार अपनी उपलब्धियों, योजनाओं और जनसंपर्क अभियानों को प्रमुखता से दिखा रहे हैं. गांव-गांव डिजिटल प्रचार का असर अब साफ दिखाई देने लगा है. चुनावी तारीखों की घोषणा से पहले ही प्रदेश का राजनीतिक तापमान बढ़ चुका है. अब सबकी निगाहें चुनाव आयोग पर टिकी हैं, जो अगले दो दिनों पंचायतराज संस्थाओं के लिए चुनाव की तारीखों का ऐलान कर सकता है.
31,214 सीटों के लिए होगी जंग
हिमाचल की सियासत अब गांव-गांव में तपने वाली है. सत्ता का असली रण इस बार पंचायत चुनावों में देखने को मिलेगा, जहां विकास, वर्चस्व और राजनीतिक प्रतिष्ठा दांव पर होगी. प्रदेश भर में कुल 31,214 सीटों पर चुनावी महासंग्राम छिड़ने जा रहा है और हर सीट पर स्थानीय राजनीति का तापमान लगातार बढ़ रहा है. जिला परिषद से लेकर पंचायत सदस्य तक, हर पद पर दावेदारों की लंबी कतारें होंगी. सबसे बड़ी लड़ाई पंचायत मेंबर के 21,678 पदों पर होगी, जहां गांव की राजनीति का सीधा फैसला जनता के हाथ में होगा. वहीं, पंचायत प्रधान के 3,758 और उपप्रधान के 3,758 पदों पर भी प्रतिष्ठा की जंग बेहद दिलचस्प रहने वाली है. पंचायत समिति के 1,769 पदों पर राजनीतिक दलों के उम्मीदवार आमने-सामने होंगे, वहीं जिला परिषद सदस्य के 251 पदों पर भी कड़ा मुकाबला तय माना जा रहा है.
कांगड़ा में सबसे अधिक 6977 सीटें
हिमाचल में पंचायतीराज संस्थाओं के चुनाव को लेकर सियासी सरगर्मियां तेज हो गई हैं. प्रदेश के सबसे बड़े जिला कांगड़ा में 6,977 सीटों के साथ चुनावी रण का केंद्र बना हुआ है. वहीं, लाहौल-स्पीति में सबसे कम 378 सीटों पर संघर्ष देखने को मिलेगा. इसी तरह से बिलासपुर में 1,615, चंबा में 2,584, हमीरपुर में 1,998, किन्नौर में 635, कुल्लू में 2,043, मंडी में 4,762, शिमला में 3,523, सोलन में 2,216, सिरमौर में 2,344 और ऊना में 2,139 सीटों पर उम्मीदवारों के बीच वर्चस्व की जंग लड़ी जाएगी.
पिछली बार से 636 सीटें अधिक
हिमाचल में पंचायत चुनावों का रण इस बार पहले से कहीं ज्यादा दिलचस्प और व्यापक होने जा रहा है. वर्ष 2021 में पंचायतीराज संस्थाओं के चुनाव में कुल 30,578 सीटों के लिए उम्मीदवारों के बीच जोरदार मुकाबला देखने को मिला था, वहीं इस बार पंचायतों की संख्या बढ़ने के साथ चुनावी तस्वीर भी बदल गई है. पंचायत सदस्य से लेकर जिला परिषद सदस्यों तक अब कुल सीटों की संख्या बढ़कर 31,214 पहुंच गई है. यानी पिछली बार की तुलना में इस बार 636 अधिक सीटों पर लोकतंत्र का महायुद्ध लड़ा जाएगा.

