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Thursday, April 16, 2026

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हिमाचल बजट सत्र: RDG पर आज अंतिम बहस- PM से मिलने जाएंगे CM, मंत्री और MLA, मांगेंगे हक

ऑनलाइन न्यूज नेटवर्क (ONN)

हिमाचल प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र के पहले चरण का आज निर्णायक दिन माना जा रहा है। रेवेन्यू डेफिसिट ग्रांट (RDG) को लेकर सदन में चल रही बहस अपने अंतिम पड़ाव पर है और इसी चर्चा के बाद राज्य सरकार का अगला कदम दिल्ली की ओर बढ़ेगा। CM आज सदन में सरकार का पक्ष रखेंगे और फिर RDG बहाली के लिए केंद्र से सीधी बातचीत की तैयारी है।

RDG के मुद्दे पर सदन में राजनीतिक टकराव भी तेज होने के आसार हैं। सत्तापक्ष लगातार यह सवाल उठा रहा है कि भारतीय जनता पार्टी RDG बंद किए जाने के फैसले के समर्थन में है या विरोध में। ऐसे में आज की चर्चा के दौरान विपक्ष का रुख क्या रहता है, इस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।

वित्त आयोग की सिफारिश से बढ़ी चिंता

राज्य सरकार का कहना है कि 16वें वित्त आयोग ने केंद्र से RDG समाप्त करने की सिफारिश की है। यदि यह फैसला लागू होता है, तो हिमाचल को हर साल करीब 10 हजार करोड़ रुपये का नुकसान होगा। पहले से ही आर्थिक दबाव झेल रहे प्रदेश पर कुल कर्ज लगभग 1 लाख 10 हजार करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है। सरकार का दावा है कि RDG बंद होने से वित्तीय स्थिति और अधिक गंभीर हो सकती है।

आज की कार्यवाही की शुरुआत प्रश्नकाल से होगी। इस दौरान बाहरी राज्यों के सेब खरीददारों द्वारा हिमाचल के बागवानों के भुगतान न करने का मामला भी सदन में गूंजेगा। ठियोग से विधायक कुलदीप सिंह राठौर ने इस संबंध में प्रश्न लगाया है। उनका कहना है कि हर साल कई लदानी बागवानों से सेब खरीदकर भुगतान किए बिना फरार हो जाते हैं, जिससे किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ता है।

RDG पर आज सीएम देंगे जवाब

विधानसभा के तीसरे दिन सदन में केंद्र सरकार द्वारा RDG बंद किए जाने से जुड़े सरकारी संकल्प पर चर्चा जारी रहेगी। इस बहस के अंत में CM सुखविंदर सिंह सुक्खू सदन को संबोधित करेंगे। चर्चा के बाद इस सरकारी संकल्प को पारित कर केंद्र सरकार को भेजने की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।

सरकारी संकल्प पारित होने के बाद राज्य सरकार RDG बहाली के लिए दिल्ली जाने की रणनीति पर काम कर रही है। जानकारी के मुताबिक मुख्यमंत्री सुक्खू, कैबिनेट मंत्री और विधायक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात करेंगे। इस दौरान विधानसभा से पारित संकल्प प्रधानमंत्री को सौंपा जाएगा, ताकि केंद्र सरकार तक राज्य की आपत्ति और मांग औपचारिक रूप से पहुंच सके।

 

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