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Tuesday, April 21, 2026

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सुक्खू सरकार ने बदली एक और व्यवस्था- अब ऑनलाइन होगी शराब ठेकों की नीलामी, जानें

ऑनलाइन न्यूज नेटवर्क (ONN)

हिमाचल प्रदेश में अब शराब ठेकों और प्रवेश टोल बैरियरों के लिए दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। सरकार ने आबकारी व्यवस्था में बड़ा बदलाव करते हुए पूरी प्रक्रिया को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर शिफ्ट करने का फैसला लिया है। इसका मकसद सिर्फ तकनीक का इस्तेमाल नहीं, बल्कि पारदर्शिता और जवाबदेही को मजबूत करना बताया जा रहा है।

पहली बार पूरी तरह ऑनलाइन होगी नीलामी

राज्य में पहली बार खुदरा आबकारी शराब ठेकों और प्रवेश टोल बैरियरों का आवंटन पूरी तरह ऑनलाइन ई-नीलामी के जरिए किया जाएगा। यह प्रक्रिया वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए लागू होगी। अब बोलीदाता अपने घर या कार्यालय से ही दूरस्थ रूप से नीलामी प्रक्रिया में हिस्सा ले सकेंगे। सरकार का दावा है कि इससे व्यवस्था ज्यादा पारदर्शी और सरल होगी।

ई-नीलामी इकाई-वार आयोजित की जाएगी। इसका मतलब है कि हर इकाई में शामिल खुदरा शराब ठेकों के लिए अलग-अलग ऑनलाइन बोलियां आमंत्रित की जाएंगी। इससे बोली प्रक्रिया को ज्यादा स्पष्ट और प्रतिस्पर्धी बनाने में मदद मिलेगी। केवल आधिकारिक पोर्टल के माध्यम से जमा की गई बोलियां ही मान्य होंगी।

ई-नीलामी में भाग लेने के लिए सभी आवेदकों को मान्य डिजिटल सिग्नेचर सर्टिफिकेट के जरिए पंजीकरण करना होगा। राज्य कर एवं आबकारी विभाग के आयुक्त डॉ. यूनुस ने स्पष्ट किया है कि बिना डिजिटल सिग्नेचर के कोई भी आवेदन स्वीकार नहीं किया जाएगा। पंजीकरण और बोली दोनों प्रक्रियाएं केवल नामित ई-नीलामी पोर्टल पर ही होंगी।

वेबसाइट पर मिलेंगे सभी जरूरी दस्तावेज

ई-नीलामी पोर्टल का लिंक विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध कराया जाएगा। बोलीदाताओं को सलाह दी गई है कि प्रक्रिया में शामिल होने से पहले आबकारी नीति 2026-27, मानक संचालन प्रक्रियाएं और उपयोगकर्ता मार्गदर्शिका को ध्यान से पढ़ लें। ये सभी दस्तावेज वेबसाइट और पोर्टल पर उपलब्ध रहेंगे।

बोलीदाताओं की सुविधा के लिए विभाग ने हेल्पलाइन और व्हाट्सऐप नंबर भी जारी किए हैं। किसी भी तकनीकी या प्रक्रिया से जुड़े सवालों के लिए इच्छुक लोग इन नंबरों पर संपर्क कर सकेंगे। इसके अलावा, नॉर्थ, साउथ और सेंट्रल जोन के लिए अलग-अलग संपर्क नंबर भी तय किए गए हैं, ताकि सहभागिता में किसी तरह की परेशानी न हो।

सरकार का कहना है कि ई-नीलामी व्यवस्था से न सिर्फ प्रक्रिया तेज होगी, बल्कि आवंटन को लेकर उठने वाले सवालों और शिकायतों में भी कमी आएगी। डिजिटल सिस्टम के जरिए हर कदम रिकॉर्ड में रहेगा, जिससे जवाबदेही तय करना आसान होगा।

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