ऑनलाइन न्यूज नेटवर्क (ONN)
हिमाचल प्रदेश के ऊना जिले की एक विशेष अदालत ने नाबालिग छात्रा के साथ सामूहिक दुष्कर्म के गंभीर मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। अदालत ने दो दोषियों को 22-22 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। यह मामला वर्ष 2024 का है, जिसमें पोक्सो (POCSO) एक्ट के तहत कार्रवाई करते हुए दोषियों को सलाखों के पीछे भेजा गया है।
क्या था मामला ?
जानकारी के मुताबिक, 16 वर्षीय पीड़िता ने पुलिस को दी शिकायत में बताया था कि उसकी पहचान जालंधर (पंजाब) निवासी सन्नी उर्फ गुरप्रीत से हुई थी। 26 मई 2024 को गुरप्रीत और उसका साथी कार्तिक पीड़िता को स्कूटी पर एक धार्मिक स्थल ले गए। आरोप था कि वहां छात्रा को जबरन शराब पिलाई गई और उसके साथ दरिंदगी की गई। पीड़िता ने अपनी शिकायत में बताया था कि नशे की हालत में आरोपियों ने उसके साथ बार-बार दुष्कर्म किया। छात्रा ने बताया कि इसके बाद उसे कुछ याद नहीं रहा। अगली सुबह जब उसे होश आया, तो उसने स्वयं को एक कार की डिक्की में पाया। छात्रा ने तुरंत अपने परिजनों को सूचित किया, जिसके बाद मामला पुलिस तक पहुंचा। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए IPC की धारा 376-डी और पोक्सो (POCSO) एक्ट के तहत मामला दर्ज किया था। मेडिकल जांच में वारदात की पुष्टि हुई।
संवेदनशील मामले की सुनवाई सेशन स्पेशल जज ऊना, नरेश ठाकुर की अदालत में हुई। सुनवाई के दौरान कुल 18 गवाहों के बयान दर्ज किए गए। अभियोजन पक्ष की ओर से जिला न्यायवादी एकलव्य ने मामले की पैरवी की। पीड़िता की ओर से जिला न्यायवादी एकलव्य ने प्रभावी ढंग से पक्ष रखा और वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर दोषियों का अपराध सिद्ध किया। साक्ष्यों और गवाहों के बयानों को पुख्ता मानते हुए अदालत ने दोनों आरोपियों को दोषी पाया और दोनों को 22-22 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई। साथ ही अदालत ने दोनों पर 50-50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि दोषी जुर्माने की राशि जमा नहीं करते हैं, तो उन्हें दो-दो वर्ष का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
