ऑनलाइन न्यूज नेटवर्क (ONN)
बेटियों के लिए पिता ही सबसे बड़ा हौसला होते हैं. सिरमौर जिले की दो बेटियों के सपनों को पिता ने कभी भी टूटने न दिया. खुद व्हील चेयर पर थे, लेकिन बेटियों के साथ मजबूती से खड़े रहे. अब जब बेटियों की उच्च शिक्षा का समय आया तो राज्य के मुखिया सुखविंदर सिंह सुक्खू ने आगे आकर मदद का हाथ बढ़ाया. सीएम से दो लाख रुपए मंजूर किए. इस सुख भरी घोषणा से बेटियों के आंसू छलक आए. ये मार्मिक कहानी सभी को भावुक कर देगी.

सिरमौर के गिरिपार क्षेत्र के टटियाना गांव की रहने वाली शीतल शर्मा ने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू से मुलाकात के बाद एक भावुक वीडियो जारी किया, जिसमें उन्होंने अपने परिवार के वर्षों पुराने संघर्ष और मुख्यमंत्री से मिली मदद का जिक्र किया. वीडियो में उनकी आंखों में खुशी के आंसू भी हैं और पिता के संघर्ष पर गर्व भी.

2013 के हादसे ने बदल दी जिंदगी
शीतल ने बताया कि वर्ष 2013 में उनके पिता पेड़ से गिरकर गंभीर रूप से घायल हो गए थे. हादसे के बाद उनका जीवन व्हीलचेयर तक सीमित हो गया. परिवार की आर्थिक स्थिति भी कमजोर हो गई, लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी. पांच बच्चों की पढ़ाई और परिवार की जिम्मेदारियों को निभाने के लिए उन्होंने हर मुश्किल का डटकर सामना किया. इसी संघर्ष के बीच शीतल और उनकी बड़ी बहन कविता शर्मा ने अपनी पढ़ाई जारी रखी और 10वीं व 12वीं की परीक्षा में क्रमशः 85 और 87 प्रतिशत अंक हासिल किए.
हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय में प्रवेश मिलने के बाद आर्थिक संकट दोनों बहनों के सपनों के सामने सबसे बड़ी चुनौती बन गया. इसी उम्मीद के साथ दोनों बहनें 24 जुलाई को मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू से मिलने पहुंचीं. शीतल के मुताबिक मुख्यमंत्री ने उनकी पूरी बात ध्यान से सुनी और तुरंत दो लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने के निर्देश दिए. साथ ही उन्होंने भविष्य में भी जरूरत पड़ने पर बेझिझक मिलने का भरोसा दिया.
“हमारी बात रखने से पहले ही मिल गई मदद”
मुख्यमंत्री से मुलाकात के बाद जारी वीडियो में शीतल ने कहा, “जो बात हम रखने गए थे, वह तो हम सीएम सर से कह ही नहीं पाए. उससे पहले ही उन्होंने हमारी मदद कर दी. उनके लिए यह एक सहायता राशि होगी, लेकिन हमारे लिए यह सिर्फ पैसे नहीं, बल्कि हमारे सपनों को मिली नई उड़ान है.” पिता का जिक्र करते हुए शीतल भावुक हो गईं. उन्होंने कहा, “हम पांच भाई-बहन हैं. सबसे ज्यादा संघर्ष हमारे पापा ने किया है. व्हीलचेयर पर बैठकर परिवार चलाना, बच्चों को पढ़ाना और हमें कभी हार नहीं मानने देना आसान नहीं होता. आज हम जिस मुकाम पर हैं, उसमें सबसे बड़ा योगदान हमारे पापा का है. मुख्यमंत्री से मिलने का हौसला भी हमें उन्होंने ही दिया.”
इस बात की शिकायत करने गई थी शीतल
शीतल ने बताया कि वह मुख्यमंत्री से मुख्य रूप से सुख आश्रय योजना से जुड़ी समस्या बताने गई थीं. उन्होंने कहा कि वर्ष 2023 में योजना शुरू होने के समय वह इसके दायरे में नहीं आती थीं, लेकिन दिसंबर 2025 में नियमों में बदलाव के बाद पात्र हो गईं. इसके बावजूद अधिकारियों ने उनके दस्तावेज स्वीकार नहीं किए. उन्होंने मुख्यमंत्री सेवा संकल्प हेल्पलाइन पर भी संपर्क किया, लेकिन समाधान नहीं मिला. हालांकि मुख्यमंत्री से मुलाकात के दौरान उन्हें आर्थिक सहायता मिली और भविष्य के लिए भी भरोसा मिला. वीडियो के अंत में शीतल के पिता ने हाथ जोड़कर मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त किया और अपने पांचों बच्चों को सुख आश्रय योजना का लाभ देने की अपील की. वहीं शीतल ने जरूरतमंद परिवारों से भी सरकारी योजनाओं की जानकारी लेकर उनका लाभ उठाने का आग्रह किया.
