ऑनलाइन न्यूज नेटवर्क (ONN)
भविष्य में लोगों की जान बचाने वाले भावी डॉक्टर ही जब नशे की गिरफ्त में आ जाएं, तो यह एक गंभीर चिंता का विषय है। ऐसा ही एक हैरान करने वाला मामला डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (टांडा) से सामने आया है। यहां गर्ल्स हॉस्टल में रह रही एमबीबीएस तृतीय वर्ष की एक प्रशिक्षु महिला डॉक्टर के कमरे से शराब की लगभग 16 बोतलें बरामद हुई हैं। इतना ही नहीं, जांच के प्रशिक्षु डॉक्टर नशे के कारण बेसुध हालत में मिली।
महाविद्यालय के प्रधानाचार्य डॉ. मिलाप शर्मा ने मामले की जानकारी देते हुए बताया कि उन्हें काफी समय से सूचनाएं मिल रही थीं कि गर्ल्स हॉस्टल में लड़कियां नशे का सेवन कर रही हैं। इसी सूचना के आधार पर जब हॉस्टल में जांच की गई, तो तृतीय वर्ष की यह छात्रा नशे में अचेत (बेहोश) अवस्था में पाई गई। इस घोर अनुशासनहीनता पर प्रिंसिपल डॉ. मिलाप शर्मा ने उक्त प्रशिक्षु डॉक्टर को 1 महीने के लिए कॉलेज से निष्कासित कर दिया है। इसके साथ ही उस पर 75,000 रुपए का जुर्माना भी लगाया गया है।
कॉलेज ग्रुप्स में डाला मैसेज, ताकि दूसरों को मिले सबक
डॉ. मिलाप शर्मा ने स्पष्ट किया कि मेडिकल कॉलेज में प्रशिक्षु डॉक्टरों द्वारा किसी भी प्रकार का नशा बिल्कुल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। भविष्य में भी यदि ऐसा कोई मामला सामने आता है, तो इसी तरह की कड़ी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। अन्य छात्रों के लिए एक सबक पेश करने के मकसद से, इस प्रशिक्षु महिला डॉक्टर को रंगे हाथों पकड़े जाने और उसे दी गई सजा की पूरी जानकारी कॉलेज के सभी आधिकारिक व्हाट्सएप ग्रुप्स में डाल दी गई है।
5 जून को भी पकड़े गए थे 4 प्रशिक्षु डॉक्टर
बता दें कि टांडा मेडिकल कॉलेज में नशे के खिलाफ यह कोई पहली कार्रवाई नहीं है। इससे ठीक पहले 5 जून को भी प्रिंसिपल डॉ. मिलाप शर्मा द्वारा किए गए एक औचक निरीक्षण के दौरान बॉयज/हॉस्टल में 4 प्रशिक्षु डॉक्टरों को नशे की हालत में पकड़ा गया था। उस समय भी प्रशासन ने कड़ा कदम उठाते हुए चारों छात्रों पर 50-50 हजार रुपए का जुर्माना लगाया था और उन्हें एक महीने के लिए निष्कासित किया था। डॉ. मिलाप शर्मा ने स्पष्ट किया कि नशे में लिप्त पाए जाने वाले छात्रों पर यह आर्थिक दंड व कार्रवाई विश्वविद्यालय अनुदान आयोग , यूनिवर्सल और संबंधित तय नियमों के अंतर्गत की जा रही है।
