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Tuesday, April 14, 2026

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Shimla: क्षेत्रीय अस्पतालों में रेडियोलॉजिस्ट और अन्य तकनीशियनों की कमी पर हाईकोर्ट सख्त, राज्य सरकार से मांगा जवाब

ऑनलाइन न्यूज नेटवर्क (ONN)

हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय ने राज्य के स्वास्थ्य ढांचे की पोल खोलते हुए सरकार को कड़ी फटकार लगाई है। क्षेत्रीय अस्पतालों में रेडियोलॉजिस्ट और अन्य तकनीशियनों की भारी कमी और करोड़ों की मशीनों के धूल फांकने के मामले पर कोर्ट ने कड़ा संज्ञान लिया है। मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश बीसी नेगी की खंडपीठ ने इस जनहित मामले में मुख्य सचिव, प्रधान सचिव (स्वास्थ्य) और स्वास्थ्य निदेशक को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।

ऊना अस्पताल की खबर पर लिया संज्ञान

कोर्ट ने यह कार्रवाई ऊना के क्षेत्रीय अस्पताल की दयनीय स्थिति पर प्रकाशित एक खबर पर स्वत: संज्ञान लेते हुए की है। खबर के मुताबिक, ऊना अस्पताल में रेडियोलॉजिस्ट और तकनीशियनों के न होने से तीन अल्ट्रासाउंड मशीनें लंबे समय से बंद पड़ी हैं और धूल फांक रही हैं। इसका सीधा खामियाजा मरीजों, विशेषकर गर्भवती महिलाओं को भुगतना पड़ रहा है, जिन्हें जांच के लिए दर-दर भटकना पड़ता है।

सरकार की दलील पर कोर्ट की फटकार

सुनवाई के दौरान सरकार ने पक्ष रखा कि ऊना अस्पताल में हाल ही में दो डॉक्टरों की तैनाती कर दी गई है। इस पर खंडपीठ ने सरकार को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि यह समस्या का स्थायी समाधान नहीं है। कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि जिन अस्पतालों से इन डॉक्टरों को हटाया गया है, अब वहां की स्वास्थ्य सेवाएं चरमरा जाएंगी। इधर का डॉक्टर उधर भेजना समस्या का निवारण नहीं है, बल्कि रिक्त पदों को भरना जरूरी है।

रैफरल सैंटर बनकर रह गए अस्पताल

कोर्ट ने माना कि सिर्फ ऊना ही नहीं, बल्कि प्रदेश के कई क्षेत्रीय अस्पतालों का यही हाल है। सुविधाओं के अभाव में मरीजों को मजबूरन आईजीएमसी शिमला, टांडा मेडिकल कॉलेज, एम्स बिलासपुर या पीजीआई चंडीगढ़ के चक्कर काटने पड़ते हैं। कोर्ट ने सरकार से पूछा है कि आखिर इन रिक्त पदों को भरने और आम जनता को उचित चिकित्सा सुविधाएं देने में देरी क्यों हो रही है?

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