*पांवटा साहिब: 9 महीने पहले जहां से रेस्क्यू हुआ था, वहीं पहुंचा बिट्टू… अब दूसरों का सहारा बना*
_मानसिक रूप से बीमार युवक ने आश्रम में मिला प्यार, अब रेस्क्यू टीम का हिस्सा बनकर लौटा_
पांवटा साहिब। इंसानियत की मिसाल पेश करती एक मार्मिक कहानी शुक्रवार को पांवटा साहिब में देखने को मिली। 9 महीने पहले जिस सड़क से मानसिक रूप से बीमार अवस्था में एक युवक को रेस्क्यू कर रूड़की के अपना घर आश्रम भेजा गया था, ठीक उसी स्थान पर वही युवक शुक्रवार को एंबुलेंस से उतरकर दूसरे मानसिक रोगी को रेस्क्यू करने पहुंचा।
5 अक्टूबर 2025: असहाय अवस्था में मिला था बिट्टू
यह पूरी कहानी 5 अक्टूबर 2025 से शुरू होती है। सामाजिक कार्यकर्ता संजय कंवर को पांवटा साहिब नगर परिषद कार्यालय के बाहर सड़क पर एक युवक असहाय अवस्था में घूमता मिला था। मैले-कुचैले कपड़े, उलझे बाल, नंगे पैर और मानसिक स्थिति ठीक न होने के कारण वह अपना नाम-पता तक नहीं बता पा रहा था।
संजय कंवर ने तुरंत उसे रेस्क्यू कर अपनी गाड़ी के माध्यम से उत्तराखंड के रूड़की स्थित अपना घर आश्रम में शिफ्ट कराया। आश्रम में युवक ने अपना नाम बिट्टू बताया।
रूड़की में मिला नया जीवन और पहचान
अपना घर आश्रम में बिट्टू का कई महीनों तक इलाज चला। डॉक्टरों, मनोचिकित्सकों और आश्रम के स्टाफ की देखरेख में धीरे-धीरे उसकी मानसिक स्थिति में सुधार हुआ। वह बोलने लगा, हंसने लगा और धीरे-धीरे अपने घर का पता भी बताने लगा।
आश्रम प्रबंधन ने बिट्टू द्वारा बताए गए पते परिजनों से संपर्क किया। फोन पर बातचीत हुई, लेकिन परिजनों ने उसे वापस लेने से इनकार कर दिया। इसके बाद आश्रम ने मानवता की मिसाल पेश करते हुए बिट्टू को आश्रम में ही रोजगार दे दिया।
अब रेस्क्यूअर बना बिट्टू
ठीक होने के बाद बिट्टू ने आश्रम में रहकर मेहनत शुरू कर दी। वह अब आश्रम में बेसहारा लोगों के बाल काटता है, उन्हें खाना परोसता है और नए मरीजों से बातचीत कर उनका हौसला बढ़ाता है।
शुक्रवार 19 जून 2026 को अपना घर आश्रम की रेस्क्यू टीम एक मानसिक रूप से बीमार व्यक्ति को लेने के लिए पांवटा साहिब पहुंची। एंबुलेंस से उतरकर आने वाला युवक कोई और नहीं बल्कि बिट्टू ही था।
*“जो दर्द मैंने सहा, वो कोई और न सहे”*
पांवटा साहिब पहुंचकर बिट्टू सबसे पहले उसी स्थान पर गया जहां से 9 महीने पहले उसे रेस्क्यू किया गया था। उसने संजय कंवर से मिलकर कहा – “भैया, मुझे यहां बहुत प्यार मिला। आश्रम ने मुझे नया जीवन दिया। अब मैं चाहता हूं कि जो दर्द मैंने सहा, वो दर्द कोई और न सहे। इसलिए मैं दूसरों की मदद करने आया हूं।”
संजय कंवर ने कहा कि यह पल उनके जीवन का सबसे भावुक क्षण था। जिस युवक को 9 महीने पहले बहुत बुरी दशा में उठाया था, आज वही युवक दूसरों को जीवन देने के लिए तैयार खड़ा था।
समाज के लिए प्रेरणा
इस घटना ने साबित कर दिया कि यदि मानसिक रोगियों को समय पर इलाज, सम्मान और अपनापन मिले तो वे समाज पर बोझ नहीं बल्कि समाज के सहारे बन सकते हैं। बिट्टू की कहानी उन सभी परिवारों के लिए प्रेरणा है जो मानसिक रूप से बीमार सदस्यों को छोड़ देते हैं।

