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Wednesday, June 3, 2026

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पिता चलाते हैं ट्रक, बेटा भारतीय नौसेना में बन गया बड़ा अफसर, क्षेत्र में खुशी की लहर

ऑनलाइन न्यूज नेटवर्क (ONN)

कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती और लहरों से डरकर नौका कभी पार नहीं होती’ यह पंक्तियां विकास खंड झंडूता के युवा सैन्य अधिकारी अभिषेक शर्मा पर पूरी तरह सटीक बैठती हैं। जिला बिलासपुर की झंडूता विधानसभा क्षेत्र की ग्राम पंचायत झबोला के गांव तांबड़ी निवासी अभिषेक शर्मा ने भारतीय नौसेना में सब लैफ्टिनैंट बनकर अपने न केवल अपने परिवार, गांव और पूरे क्षेत्र, बल्कि प्रदेश का नाम भी रोशन किया है। उनकी इस उपलब्धि से क्षेत्र में खुशी का माहौल है और लोगों में गर्व की भावना देखने को मिल रही है।

जानकारी के अनुसार अभिषेक शर्मा इसी माह 6 जून को अपने पैतृक गांव झबोला पहुंच रहे हैं। उनके घर आगमन पर क्षेत्रवासियों द्वारा भव्य स्वागत की तैयारियां की जा रही हैं। ग्रामीणों, सामाजिक संगठनों तथा युवाओं ने उनकी सफलता को पूरे क्षेत्र के लिए प्रेरणादायक बताया है। अभिषेक शर्मा के पिता पवन कुमार ट्रक चालक हैं, जबकि माता मीना देवी गृहिणी हैं। उनका छोटा भाई भी भारतीय सेना में अपनी सेवाएं दे रहा है। साधारण परिवार से संबंध रखने वाले अभिषेक शर्मा ने अपनी मेहनत, लगन और अनुशासन के बल पर यह मुकाम हासिल किया है।

काबिलेगौर है कि अभिषेक शर्मा वर्ष 2017 में भारतीय नौसेना में भर्ती हुए थे। उन्होंने अपनी यूनिट में शारीरिक प्रशिक्षक के रूप में भी सेवाएं प्रदान कीं। नौसेना में रहते हुए उन्होंने अपने कर्तव्यों का निष्ठापूर्वक निर्वहन किया और निरंतर आत्मविकास की दिशा में प्रयासरत रहे। अनुशासन, उत्कृष्ट सेवा तथा कठिन परिश्रम के बल पर उन्होंने वर्ष 2021 में अधिकारी रैंक के लिए परीक्षा दी। कड़ी मेहनत और समर्पण के परिणामस्वरूप उन्होंने भारतीय नौसेना अकादमी से सफलतापूर्वक प्रशिक्षण पूर्ण किया और पासिंग आऊट के बाद सब लैफ्टिनैंट का पद प्राप्त किया।

अभिषेक शर्मा की प्रारंभिक शिक्षा राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय शाहतलाई में हुई। इसके बाद उन्होंने नौकरी के साथ-साथ अपनी स्नातक की पढ़ाई भी पूरी की। बचपन से ही अनुशासन, मेहनत और देशसेवा को जीवन का मूल मंत्र मानने वाले अभिषेक ने 12वीं की शिक्षा पूर्ण करने के तुरंत बाद वर्ष 2017 में भारतीय नौसेना में भर्ती होकर देशसेवा का मार्ग चुना।

अभिषेक शर्मा ने अपनी सफलता पर का श्रेय अपने माता-पिता, शिक्षकों तथा वरिष्ठ अधिकारियों के मार्गदर्शन और सहयोग को दिया। उन्होंने कहा कि भारतीय नौसेना की वर्दी पहनकर मातृभूमि की सेवा करना उनके जीवन का सबसे बड़ा सम्मान है। उनकी इस उपलब्धि से क्षेत्र के युवाओं को भी नई प्रेरणा मिली है तथा यह साबित हुआ है कि दृढ़ संकल्प, कठिन परिश्रम और लगन से किसी भी लक्ष्य को प्राप्त किया जा सकता है।‌

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