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Friday, May 29, 2026

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शिलाई के ढाडस गांव के वीर भूतपूर्व सैनिक गोपाल बिरसांटा पंचतत्व में विलिन

शिलाई के ढाडस गांव के वीर भूतपूर्व सैनिक गोपाल बिरसांटा पंचतत्व में विलिन

*तीन महीने में दोनो सगे पूर्व सेनिक भाईयों का देहांत*

शिलाई क्षेत्र के वीर सपूत एवं भुतपर्व सैनिक हवलदार गोपाल सिंह (रिटायर्ड) (2004–2020) को नम आंखों से शनिवार को उनके पैतृक गांव ढाडस में पूरे सैन्य सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई। पूर्व सैनिक गोपाल बिरसांटा अपने बच्चों के साथ नाहन रहते थे। जहां अपने घर पर 27 मई शाम उन्हें छाती में हल्की दर्द का एहसास हुआ जिसके बाद वे स्वयं मेडिकल कॉलेज नाहन में उपचार के लिए गए और उपचार के उपरांत घर वापिस लौटे। लेकिन 28 मई को प्रातः उन्हें अचानक हृदयाघात हुआ। जिसके बाद उन्हें त्वरित उपचार हेतु मेडिकल कॉलेज नाहन ले जाया गया। जहां चिकित्सकों ने उनका उपचार शुरू किया। लेकिन कुछ घंटे बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया। पूर्व में गोपाल बिरसांटा को स्वास्थ्य संबंधित किसी भी प्रकार की कोई समस्या नहीं थी। बहादुर जवान के देहांत की खबर मिलते ही परिवार पर दुखों का पहाड़ टुट पड़ा। रिश्तेदारों व गांव तथा क्षेत्र में मातम पसर गया। उनके आकस्मिक निधन से परिवार, गांव तथा क्षेत्र गहरे शोक में डूब गया।

ज्ञात रहे कि अभी पूर्व सैनिक गोपाल बिरसांटा के बड़े भाई पूर्व सेनिक दीप बिरसांटा की चिता ठंडी नही हुई थी कि छोटे भाई का देहांत हो गया। दो महीने के अंतराल में दोनो सगे भाईयों का निधन हृदयघात से ही हुआ। जिससे परिवार में डर और चिंता का माहोल है। दोनों भाई कुछ वर्ष पूर्व ही सेना से सेवानिवृत हुए थे। 29 मई को पूर्व सैनिक गोपाल को उनके पैतृक गांव ढाडस में सैन्य सम्मान के साथ उनके 12 वर्षीय पुत्र गौरव और रैयाशं ने मुखाग्नि दी। भुतपूर्व सैनिक संगठन पांवटा साहिब व शिलाई क्षेत्र तथा 1 एन• सी• सी• बटालियन के कमांडेंट लेफ्टिनेटं कर्नल जगत चौहान तथा लेफ्टिनेटं कर्नल नरेश चौहान और क्षेत्र के पूर्व सैनिकों एवं समस्त क्षेत्रवासियों ने उन्हें पुरे सम्मान के साथ श्रद्धांजलि अर्पित की। “गोपाल फौजी अमर रहे” और “भारत माता की जय” के नारों के साथ उनकी अंतिम यात्रा गांव से स्वर्गधाम आश्रम तक निकाली गई।

संनद रहे कि गिरिपार शिलाई के ढाडस के किसान परिवार में जन्में गोपाल बिरसांटा भारतीय सेना की 12वीं डोगरा रेजिमेंट में सिपाही के रूप में भर्ती होकर अपने सैन्य जीवन की शुरुआत की। सेना में भर्ती के तुरंत बाद उन्होंने कई सेन्य ऑपरेशंस में भाग लिया। अपने अदम्य साहस और बहादुरी से उन्होंने देश के विभिन्न क्षेत्रों और परिस्थितियों में सैन्य सेवा की। अपने गौरवशाली करियर में उन्होंने देश के कई दुर्गम और संवेदनशील क्षेत्रों में सेवाएं दीं।

स्वर्गीय गोपाल अपने पीछे भरा-पूरा परिवार छोड़ गए हैं, जिसमें उनकी पत्नी रेखा देवी, तीन बच्चे गोरव, रैयांश व प्रगति तथा अन्य परिजन शामिल हैं। क्षेत्रवासियों ने उन्हें नम आंखों से विदाई देते हुए उनकी वीरता और देशभक्ति को हमेशा याद रखने की बात कही।

इस गमगीन महोल में लेफ्टिनेंट कर्नल जगत चौहान और लेफ्टिनेंट कर्नल नरेश चौहान के अलावा भूतपूर्व सैनिक संगठन पांवटा साहिब व शिलाई क्षेत्र से हॉनरेरी कैप्टन नारायण सिंह, हॉनरेरी कैप्टन विरेन्द्र तोमर, प्रदीप चौहान पूर्ण नेगी जवाहर देसाई दिनेश ठाकुर राजेंद्र देव सतपाल शर्मा सतपाल ठाकुर दीवान ठाकुर केसर ठाकुर जीवन ठाकुर बहादुर सिंह सुनील चौहान मोहन चौहान देवराज शर्मा बिंदु चौहान विनोद ठाकुर दिलीप ठाकुर नरेंद्र ठाकुर के अलावा दर्जनों भूतपूर्व सेनिकों के नेतृत्व में बड़ी संख्या में ग्रामीण व क्षेत्रवासी उपस्थित रहे।

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