ऑनलाइन न्यूज नेटवर्क (ONN)
देवभूमि हिमाचल में आसमानी आफत और बर्फबारी के दोहरे प्रहार ने जनजीवन की रफ्तार थाम दी है। हिमाचल प्रदेश के ऊंचे इलाकों में पिछले एक हफ्ते से कुदरत का रौद्र रूप देखने को मिल रहा है। रोहतांग, बारालाचा और शिंकुला जैसे दर्रों ने बर्फ की पांच फीट मोटी चादर ओढ़ ली है। आज भी इन क्षेत्रों में एक फीट तक ताजा हिमपात दर्ज किया गया। इस भारी बर्फबारी का सीधा असर पर्यटन पर पड़ा है; अटल टनल के मुहाने पर तीन फीट बर्फ जमा होने के कारण इसे वाहनों के लिए पूरी तरह बंद कर दिया गया है। सैलानियों को फिलहाल नेहरू कुंड से आगे जाने की अनुमति नहीं है।
अखाड़ा बाजार में फिर ‘खौफ’ की दस्तक
कुल्लू के अखाड़ा बाजार में पहाड़ियों के दरकने से दहशत का माहौल है। लगातार हो रही बारिश ने जमीन को इतना नरम कर दिया कि भूस्खलन का खतरा पैदा हो गया। प्रशासन ने मुस्तैदी दिखाते हुए आधा दर्जन घरों को खाली कराकर करीब 20 लोगों को सुरक्षित स्थानों और गुरुद्वारे में शिफ्ट किया है।
स्थानीय लोगों में प्रशासन के खिलाफ रोष भी है। याद दिला दें कि सितंबर 2025 में इसी जगह हुए लैंडस्लाइड ने नौ जिंदगियां लील ली थीं, लेकिन सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम न होने से आज फिर वही मंजर दोहराने का डर बना हुआ है।
बादलों की गर्जना और सर्द हवाओं ने पूरे प्रदेश को ठिठुरने पर मजबूर कर दिया है। न्यूनतम तापमान लुढ़क कर 6.6 डिग्री सेल्सियस पर आ गया है।
मनाली में पारा 3 डिग्री तक गिर चुका है। प्रदेश के अधिकतम तापमान में सामान्य के मुकाबले 6 से 7 डिग्री की भारी गिरावट देखी गई है, जिससे राज्य में शीतलहर जैसे हालात बन गए हैं।
आने वाले दिन: अभी राहत के आसार नहीं
मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार, उत्तर-पश्चिम भारत में सक्रिय हुए नए पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) के कारण 26 मार्च तक राहत मिलने की उम्मीद कम है। अगले कुछ दिनों तक ऊंचे क्षेत्रों में बर्फबारी और मैदानी इलाकों में गरज के साथ बारिश और बिजली गिरने की संभावना जताई गई है। लाहौल-स्पीति, किन्नौर और चंबा जैसे जिलों में प्रशासन ने लोगों को अनावश्यक यात्रा न करने की सलाह दी है।

