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Monday, April 13, 2026

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कांगड़ा में डॉक्टर का ”डिजिटल किडनैपिंग”: लूटे 36 लाख… शातिरों ने ऐसे लगाया चूना

ऑनलाइन न्यूज नेटवर्क (ONN)

कल्पना कीजिए कि आप अपने घर में सुरक्षित हैं, लेकिन अचानक एक फोन कॉल आता है जो आपको आपके ही कमरे में ‘कैदी’ बना देता है। हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में एक प्रतिष्ठित चिकित्सक के साथ कुछ ऐसा ही हुआ। साइबर अपराधियों ने कानून का डर दिखाकर डॉक्टर को तीन दिनों तक उनके ही घर में ‘डिजिटल अरेस्ट’ रखा और डरा-धमकाकर ₹36 लाख डकार लिए।

कैसे बुना गया ठगी का मायाजाल?

इस वारदात की शुरुआत नवंबर 2025 में हुई, जब ठगों ने पुलिस या जांच एजेंसी का मुखौटा पहनकर डॉक्टर से संपर्क किया। उन्होंने डॉक्टर पर किसी गंभीर आपराधिक साजिश में शामिल होने का झूठा आरोप मढ़ा। दबाव इतना पेशेवर था कि डॉक्टर मानसिक रूप से टूट गए।

अपराधियों ने वीडियो कॉल के जरिए उन पर नजर रखी और उन्हें कहीं भी आने-जाने या किसी को बताने से रोक दिया। केस से नाम हटाने और ‘सेटलमेंट’ के नाम पर डॉक्टर से दो किस्तों में कुल 36 लाख रुपये अपने खातों में ट्रांसफर करवा लिए।

देर से खुला राज, अब पुलिस की कार्रवाई

काफी समय तक सदमे में रहने के बाद जब पीड़ित को ठगी का अहसास हुआ, तो उन्होंने जनवरी 2026 में धर्मशाला स्थित साइबर क्राइम थाने में अपनी आपबीती सुनाई। पुलिस ने तुरंत मामले की गंभीरता को देखते हुए एफआईआर दर्ज कर ली है और अब उन खातों की तलाश की जा रही है जहाँ पैसा भेजा गया था।

अधिकारियों का क्या कहना है?

साइबर क्राइम विभाग के पुलिस उप महानिरीक्षक रोहित मालपानी ने पुष्टि की है कि साल 2026 की शुरुआत ही साइबर अपराधों की चुनौतियों के साथ हुई है। जनवरी और फरवरी के महीनों में अब तक ‘डिजिटल अरेस्ट’ और निवेश के नाम पर धोखाधड़ी के चार बड़े मामले दर्ज किए जा चुके हैं। पुलिस इन सभी मामलों की कड़ियों को जोड़ने में जुटी है।

कोई भी सरकारी एजेंसी या पुलिस वीडियो कॉल पर किसी को ‘अरेस्ट’ नहीं करती और न ही पैसे की मांग करती है। ऐसे कॉल्स आने पर तुरंत 1930 नंबर पर रिपोर्ट करें।

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