ऑनलाइन न्यूज़ नेटवर्क (ONN)
कफोटा बाजार के समीप जल शक्ति विभाग की सड़क तोड़ने और जल शक्ति विभाग व नेशनल हाईवे पर एंक्रोचमेंट के मामले में दिलचस्प मोड़ आ गया है। शनिवार को हुई जॉइंट डिमार्केशन में जहां मोर्थ के ठेकेदार द्वारा जल शक्ति विभाग की सड़क तोड़ने का मामला उजागर हुआ, वहीं राजस्व विभाग की डिमार्केशन तकनीक ने सब को हैरत में डाल दिया है।
इस निशानदेही से राजस्व विभाग के कार्यप्रणाली पर कई सवाल खड़े हो गए हैं। स्थानीय लोगों ने राजस्व विभाग पर भूमाफिया के साथ मिलीभगत के गंभीर आरोप लगाए हैं और इस निशानदेही को उच्च न्यायालय में ले जाने का मन बनाया है।
मौके पर मौजूद दर्जनों लोग उस समय हैरान हो गए जब राजस्व विभाग के फील्ड कानूनगो ने तोड़ी गई सड़क की स्थान पर नई बनाई गई पकडण्डी को नाप कर भू माफिया को साफ बचा लिया। जबकि इस निशान देही में मोर्थ के रेवेन्यू विभाग के अधिकारी भी शामिल थे।
कंपनी द्वारा तोड़ी गई जलशक्ति विभाग की सड़क का बचा हुआ हिस्सा आज भी सबसे बड़े सबूत के तौर पर वहां खड़ा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि भूमाफिया द्वारा जल शक्ति विभाग और मोर्थ की जमीन पर कब्जा कर बनाई गई दुकानों को बचाने के लिए बहुत बड़ा षड्यंत्र रचा गया है।
जहां स्थानीय लोगों और जल शक्ति विभाग ने इस निशानदेही को सिरे से नकार भी दिया है, वहीं अब जल शक्ति विभाग इस मामले में मोर्थ के खिलाफ पुलिस में मामला दर्ज करवाएगा। स्थानीय लोगों का आरोप है कि निशानदेही में राजस्व विभाग और भू माफिया के मिलीभगत स्पष्ट नजर आई है। भूमाफिया ने आंखें मूंद कर बैठे स्थानीय प्रशासन की नाक तले मोर्थ और जल शक्ति विभाग से मिलीभगत कर कफोटा में बड़े हिस्से पर एंक्रोसमेंट की है। इस खेल में बड़े भ्रष्टाचार की आशंका है। लिहाजा इस मामले की उच्च स्तरीय जांच होनी चाहिए।
उधर, जल शक्ति विभाग के एसडीओ वीरेंद्र शर्मा ने कहा कि वह इस निशानदेही से संतुष्ट नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जल शक्ति विभाग की सड़क को बिना अनुमति के तोड़ा गया है। लिहाजा विभाग इस संबंध में मोर्थ और आरजीवी कंपनी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाएगा।
उन्होंने कहा है कि जिस जगह पर कागज़ व नक्शे पर जलशक्ति विभाग की सड़क है, उसी दिशा में राजस्व विभाग की निशानदेही होनी चाहिए ताकि सड़क अच्छे से चौड़ी बनाई जा सके। जिस पर भारी वाहन भी कार्यालय तक आ जा सके।
