ऑनलाइन न्यूज नेटवर्क (ONN)
हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू ने गुरुवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आयोजित नीति आयोग की 11वीं गवर्निंग काउंसिल बैठक में हिमाचल प्रदेश के वित्तीय और विकास संबंधी मुद्दों को प्रमुखता से उठाया। ‘विकसित भारत के लिए समावेशी मानव विकास’ विषय पर आयोजित बैठक में सुक्खू ने राज्य के समक्ष मौजूद आर्थिक चुनौतियों का उल्लेख करते हुए केंद्र सरकार से विशेष सहयोग की मांग की।
‘आरडीजी बंद होने से प्रदेश की अर्थव्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा’
मुख्यमंत्री सुक्खू ने राजस्व घाटा अनुदान (आरडीजी) की समाप्ति, प्राकृतिक आपदाओं से हुए नुकसान, जीएसटी व्यवस्था के कारण राजस्व हानि तथा जलविद्युत परियोजनाओं में मुफ्त बिजली के हिस्से में कमी जैसे मुद्दों पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने प्रधानमंत्री से एक उच्चस्तरीय समिति गठित करने का आग्रह किया, जो इन कारणों से राज्य को हुए वित्तीय नुकसान का आकलन कर केंद्र सरकार को रिपोर्ट सौंपे। सुक्खू ने कहा कि आरडीजी बंद होने से प्रदेश की अर्थव्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। उन्होंने पहाड़ी राज्यों के लिए जारी 25,000 करोड़ रुपये की सहायता राशि को अपर्याप्त बताते हुए इसे बढ़ाकर 50,000 करोड़ रुपये करने की मांग की। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश देश को प्रतिवर्ष लगभग 90,000 करोड़ रुपये मूल्य की पारिस्थितिकीय सेवाएं प्रदान करता है, लेकिन इसके अनुरूप आर्थिक प्रतिपूर्ति नहीं मिलती।
मुख्यमंत्री ने बीबीएमबी से राज्य को मिलने वाली लगभग 7,000 करोड़ रुपये की बकाया राशि, आपदा राहत के लिए घोषित 1,500 करोड़ रुपए की विशेष सहायता तथा जीएसटी व्यवस्था के कारण पिछले आठ वर्षों में हुए करीब 25,000 करोड़ रुपये के राजस्व नुकसान का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने गग्गल हवाई अड्डे के विस्तार, हरित ऊर्जा परियोजनाओं और राज्य के विकास के लिए केंद्र से सहयोग का आग्रह किया।

