ऑनलाइन न्यूज नेटवर्क (ONN)
हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला के आईजीएमसी के सर्जनों ने चिकित्सा क्षेत्र में एक और अभूतपूर्व और बड़ी कामयाबी हासिल की है। यहां के डॉक्टरों ने प्रदेश में पहली बार रोबोटिक असिस्टेड सर्जरी के माध्यम से एक कैंसर पीड़ित मरीज की अत्यंत जटिल सर्जरी को सफलतापूर्वक अंजाम दिया है। अस्पताल प्रबंधन ने प्रैस वार्ता के दौरान बताया कि बड़ी आंत के कैंसर से पीड़ित एक मरीज का 20 मई को यह सफल ऑप्रेशन किया गया। ऑप्रेशन के बाद मरीज अब पूरी तरह से स्वस्थ है और उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है।
निजी अस्पतालों से बेहद कम खर्च, मरीजों को बड़ी राहत
प्रैस वार्ता में अस्पताल के एमएस डॉ. राहुल राव, सर्जरी विभाग के एचओडी डॉ. पुनीत महाजन, डॉ. रशपाल, डॉ. सुभाष और डॉ. प्रवीण भाटिया ने इस तकनीक की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए बताया कि रोबोटिक तकनीक से कैंसर की इतनी जटिल सर्जरी (जिसमें आंत के संक्रमित हिस्से को निकालकर दोबारा जोड़ना पड़ता है) किसी भी बड़े निजी या कॉर्पोरेट अस्पताल में 5.5 से 6 लाख रुपए में होती है, लेकिन मुख्यमंत्री द्वारा निर्धारित दरों के अनुसार आईजीएमसी में यह सुविधा जनरल वार्ड के मरीजों के लिए मात्र 30,000 रुपए और स्पैशल वार्ड के मरीजों के लिए 50,000 रुपए में उपलब्ध करवाई जा रही है।
रोबोटिक सर्जरी के फायदे
कम दर्द और जल्द रिकवरी : पारंपरिक ऑप्रेशन के मुकाबले इस तकनीक में मरीज को बहुत कम दर्द होता है।
कम समय में छुट्टी : गाल ब्लैडर या हर्निया जैसी छोटी रोबोटिक सर्जरी में मरीज को अगले ही दिन या उसी रात छुट्टी दे दी जाती है, जबकि कैंसर जैसी बड़ी सर्जरी के मरीज भी 2 से 3 दिन में पूरी तरह ठीक होकर घर लौट रहे हैं।
कैंसर मरीजों को राहत : आंत के कैंसर जैसी बड़ी सर्जरी में भी मरीज मात्र 2 से 3 दिनों के भीतर पूरी तरह से गतिशील होकर घर लौटने के लिए तैयार हो जाता है।
अब तक हो चुकी हैं 44 रोबोटिक सर्जरी : डॉ. राहुल
आईजीएमसी के वरिष्ठ चिकित्साधिकारी डॉ. राहुल राव ने बताया कि मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने इसी वर्ष 11 मार्च को आईजीएमसी में इस अत्याधुनिक रोबोटिक तकनीक का विधिवत उद्घाटन किया था। तब से लेकर अब तक अस्पताल में इस तकनीक से कुल 44 सफल सर्जरी की जा चुकी हैं, जिनमें से 38 सर्जरी सर्जरी विभाग द्वारा और 6 सर्जरी गायनी विभाग द्वारा की गई हैं। बड़ी आंत के कैंसर के मामले में रोबोटिक तकनीक का यह प्रयोग पूरे हिमाचल प्रदेश में पहला है।

