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Saturday, April 4, 2026

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सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्धारित समय सीमा के भीतर पंचायत चुनाव सम्पन्न करवाने के आदेश

ऑनलाइन न्यूज नेटवर्क (ONN)

प्रदेश हाईकोर्ट ने 13 फरवरी, 2026 के बाद ग्राम पंचायतों के सृजन, विभाजन, पुनर्गठन और परिसीमन के लिए जारी अधिसूचना को नजरअंदाज करते हुए सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्धारित समय सीमा के भीतर पंचायत चुनाव सम्पन्न करवाने के आदेश जारी किए हैं। न्यायाधीश विवेक सिंह ठाकुर और न्यायाधीश रंजन शर्मा की खंडपीठ ने कहा कि पंचायतों के पुनर्गठन को लेकर मसौदा 13.02.2026 के बाद अधिसूचित किया गया है। अधिनियमों और नियमों के प्रावधानों का पालन किए बिना इसके बाद परिसीमन भी पूरा कर लिया गया है। इसलिए इस प्रकार के सृजन, विभाजन, पुनर्गठन और परिसीमन को संबंधित ग्राम पंचायतों में सभी स्तरों पर चुनाव क्षेत्र के परिसीमन के निर्धारण का आधार नहीं बनाया जा सकता। अतः आने वाले चुनावों के संचालन के उद्देश्य से, चुनाव क्षेत्रों के निर्धारण के साथ-साथ रोस्टर के निर्धारण सहित इसे ध्यान में न रखा जाए।

कोर्ट ने आदेश दिए हैं कि इन पंचायतों में अधिनियम और नियमों के प्रावधानों के बाहर किए गए सृजन, विभाजन या पुनर्गठन और परिसीमन को अनदेखा करते हुए पंचायतों की स्थिति और चुनाव क्षेत्रों के पूर्व में मौजूद परिसीमन के आधार पर ही चुनाव करवाए जाएं। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि ऐसे सृजन या पुनर्गठन, विभाजन और परिसीमन के संबंध में, जो पिछले चुनावों के दौरान हुए हों और जहां सृजन, विभाजन और पुनर्गठन का प्रस्ताव 13.02.2026 से पहले अधिसूचित किया गया हो और परिसीमन हिमाचल प्रदेश के संबंधित चुनाव नियमों का कड़ाई से पालन करते हुए पूरा किया गया हो तो ऐसे सृजन, विभाजन, पुनर्गठन और परिसीमन को केवल मौजूदा प्रावधानों के अनुसार ही ध्यान में रखा जाएगा।

कोर्ट ने सरकार को आदेश दिया कि वह रोस्टर को अंतिम रूप दे और उसे 7 अप्रैल, 2026 तक प्रकाशित करे। उसके बाद प्रतिवादी चुनाव आयोग सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दी गई समय सीमा के भीतर संपूर्ण चुनाव प्रक्रिया को पूरा करना सुनिश्चित करेंगे। कोर्ट ने मामलों की वर्तमान तात्कालिकता और विशिष्ट परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए ग्राम पंचायतों के सृजन, विभाजन, पुनर्गठन और परिसीमन की वैधता से संबंधित अन्य मुद्दों पर निर्णय नहीं लिया है। इन्हें उचित कार्यवाही में, जिसमें याचिकाकर्त्ताओं द्वारा उचित अवधि के भीतर दायर की गई नई याचिका भी शामिल है, निर्णय के लिए खुला रखा गया है।

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