ऑनलाइन न्यूज नेटवर्क (ONN)
हिमाचल प्रदेश में नशे के खिलाफ चल रहा ‘चिट्टा मुक्त हिमाचल’ अभियान अब सख्त कार्रवाई के दौर में पहुंच गया है. पुलिस न केवल नशा तस्करों पर शिकंजा कस रही है, बल्कि अपने ही विभाग के दोषी कर्मचारियों पर भी कार्रवाई कर रही है. अब तक चिट्टा तस्करी में संलिप्त पाए गए 21 पुलिस कर्मियों को बर्खास्त किया जा चुका है, जिससे साफ संदेश गया है कि नशे के खिलाफ कोई समझौता नहीं होगा.
डीजीपी अशोक तिवारी ने स्पष्ट कहा है कि नशे के मामलों में किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा, चाहे वह पुलिस विभाग का ही कर्मचारी क्यों न हो. उन्होंने बताया कि प्रदेश में नशे पर लगाम लगाने के लिए हर स्तर पर कड़ी कार्रवाई की जा रही है और ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति को पूरी सख्ती से लागू किया गया है.
जन आंदोलन बना अभियान
यह अभियान मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू द्वारा 15 नवंबर 2025 को शुरू किया गया था. इसका उद्देश्य पूरे प्रदेश को नशा मुक्त बनाना है. अब यह अभियान एक बड़े जन आंदोलन का रूप ले चुका है, जिसमें सरकार, प्रशासन और आम जनता मिलकर भागीदारी निभा रहे हैं.
पुलिस कर्मियों पर भी कड़ी कार्रवाई
हाल ही में एसटीएफ कुल्लू के चार पुलिस कर्मियों को एनडीपीएस मामले में संलिप्त पाए जाने पर तत्काल प्रभाव से सेवा से बर्खास्त किया गया है. इनमें कांस्टेबल नितेश, कांस्टेबल अशोक, हेड कांस्टेबल राजेश कुमार और हेड कांस्टेबल समीर कुमार शामिल हैं. जांच के बाद इन्हें नियमों के तहत नौकरी से हटाया गया. इस कार्रवाई से पहले भी 17 पुलिस कर्मियों को नशा संबंधित मामलों में बर्खास्त किया जा चुका था. अब कुल संख्या बढ़कर 21 हो गई है. यह कदम पुलिस विभाग की पारदर्शिता और सख्ती को दर्शाता है, जिससे साफ है कि विभाग अपनी छवि को साफ रखने के लिए गंभीर है.
डीजीपी ने यह भी स्पष्ट किया कि केवल नशा तस्करी में शामिल लोगों पर ही नहीं, बल्कि ऐसे मामलों में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों पर भी सख्त कार्रवाई की जाएगी. किसी भी तरह की ढिलाई या नरमी बर्दाश्त नहीं की जाएगी और दोषियों को कड़ी सजा दी जाएगी.
‘जीरो टॉलरेंस’ नीति लागू
हिमाचल पुलिस ने साफ कर दिया है कि नशे और भ्रष्टाचार के खिलाफ ‘शून्य सहनशीलता’ की नीति को पूरी मजबूती से लागू किया जाएगा. इसका उद्देश्य पुलिस की विश्वसनीयता बनाए रखना और जनता के बीच भरोसा कायम रखना है. कुल मिलाकर ‘चिट्टा मुक्त हिमाचल’ अभियान अब निर्णायक मोड़ पर है. सरकार और पुलिस दोनों मिलकर नशे के नेटवर्क को खत्म करने में जुटे हैं. लगातार हो रही सख्त कार्रवाई से यह स्पष्ट है कि हिमाचल में नशे के खिलाफ अब कोई भी दोषी बच नहीं पाएगा, चाहे वह कोई भी हो.

