ऑनलाइन न्यूज़ नेटवर्क (ONN)

हिमाचल प्रदेश के सिरमाैर जिले के शिलाई के बहुचर्चित चीड़ के हरे पेड़ कटान मामले में वन विभाग ने वन खंड अधिकारी (बीओ) व वन रक्षक को निलंबित कर दिया है। माना जा रहा है कि जांच की आंच अभी कई और कर्मचारियों तक भी पहुंच सकती है।

पेड़ कटान के बाद तस्वीरें व वीड़ियो सामने आने के बाद प्रदेशभर में इसकी चर्चा हुई। मामले ने राजनीतिक रूप ले लिया था। एक और जहां शिलाई के पूर्व विधायक बलदेव तोमर ने मीडिया के समक्ष मंत्री हर्ष वर्धन को घेरा था वहीं विपक्ष के नेता जयराम ठाकुर ने भी सरकार पर मीडिया के समक्ष भ्र्ष्टाचार में सलिप्त के आरोप लगाए थे। इससे विभाग व सरकार की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं।
बता दें, मामला उस समय सुर्खियों में आया, जब शिलाई में पेट्रोल पंप के समीप एक घासनी में बड़े पैमाने पर चीड़ के पेड़ काटे जाने की सूचना सामने आई। स्थानीय स्तर पर चर्चा है कि यह कटान एक प्रभावशाली परिवार ने करवाया। शुरुआती तौर पर दावा किया गया कि 25 पेड़ों को काटने की अनुमति ली गई थी, लेकिन हैरानी की बात यह है कि कथित अनुमति का कोई वैध परमिट अब तक वन विभाग शिलाई कार्यालय तक नहीं पहुंच पाया है।
वन परिक्षेत्र अधिकारी विश्वमित्र शर्मा के नेतृत्व में घटना के दूसरे दिन विभागीय टीम ने मौके का निरीक्षण किया, जहां कुल 307 कटे हुए पेड़ चिह्नित किए गए। एक साथ बिना अनुमति के सैकड़ों पेड़ काटे जाने पर वन विभाग ने संबंधित लोगों के खिलाफ शिलाई पुलिस थाना में मामला दर्ज करवा दिया।
मामले में आगामी कार्रवाई जारी.. डीएफओ
इस मामले में पुलिस अपने स्तर पर कार्रवाई में जुटी हुई है। सूत्रों के अनुसार इस पूरे प्रकरण में एक ही परिवार के कई सदस्य जांच के दायरे में आए हैं। इनमें पूर्व जिला परिषद सदस्य और शिलाई नाया पंचायत का एक बीडीसी सदस्य भी शामिल बताया जा रहे हैं। मामला हाईप्रोफाइल होने के चलते विपक्षी दलों ने सत्तारूढ़ दल पर इस मामले में सीधे-सीधे सवाल उठाए हैं।
जिस उपरांत अब वन विभाग ने दो कर्मचारियों को निलंबित कर दिया है। वन विभाग के डीएफओ बीआर कंडेटा ने पुष्टि करते हुए बताया कि शिलाई क्षेत्र में संबंधित वन खंड अधिकारी व वन रक्षक को निलंबित कर दिया गया है। मामले में आगामी कार्रवाई जारी है।
