Wednesday, March 11, 2026
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CM सुक्खू ने IGMC में किया रोबोटिक सर्जरी का शुभारंभ, अब रोबोट करेगा सफल ऑपरेशन

ऑनलाइन न्यूज नेटवर्क (ONN)

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देवभूमि हिमाचल के चिकित्सा क्षेत्र में एक नए युग का सूत्रपात हुआ। इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज (IGMC) शिमला में अत्याधुनिक रोबोटिक सर्जरी सेवा का विधिवत आगाज़ हो गया है। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने स्वयं अस्पताल पहुंचकर इस तकनीक की कार्यप्रणाली का अवलोकन किया।

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खर्च और सुविधाओं का लेखा-जोखा

स्वास्थ्य क्षेत्र में इस तकनीकी क्रांति को आम आदमी की जेब के अनुकूल रखने के लिए सरकार ने शुल्कों का निर्धारण भी कर दिया है।

सामान्य श्रेणी: आईजीएमसी में रोबोटिक विधि से ऑपरेशन कराने पर मात्र 30,000 रुपये का खर्च आएगा।

स्पेशल वार्ड: जो मरीज विशेष सुविधाओं वाले वार्ड का चयन करेंगे, उन्हें इस सर्जरी के लिए 50,000 रुपये देने होंगे।

हिमकेयर कार्ड पर स्थिति: इस सर्जरी को सरकारी बीमा योजना ‘हिमकेयर’ के दायरे में लाया जाए या नहीं, इस पर फैसला संबंधित विभाग की विस्तृत रिपोर्ट आने के बाद ही लिया जाएगा।

पूरे प्रदेश में फैलेगा तकनीक का जाल

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि बजट की कमी को स्वास्थ्य सेवाओं के आड़े नहीं आने दिया जाएगा। उन्होंने भविष्य की योजनाओं का खाका खींचते हुए बताया कि वर्तमान में तीन मेडिकल कॉलेजों में यह सुविधा शुरू हो चुकी है।

नाहन और चंबा के मेडिकल कॉलेजों में भी जल्द ही रोबोट तैनात किए जाएंगे। हमीरपुर के लिए मशीनरी की खरीद प्रक्रिया जारी है। सरकार कुल्लू जैसे बड़े क्षेत्रीय अस्पतालों में भी रोबोटिक सर्जरी शुरू करने की संभावनाओं को तलाश रही है।

गैस संकट और सियासत पर दो टूक

सर्जरी के निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री ने समसामयिक मुद्दों पर भी अपनी बात रखी। देश में गहराते गैस संकट पर उन्होंने गेंद केंद्र के पाले में डालते हुए कहा कि यह मामला पूरी तरह केंद्र सरकार के क्षेत्राधिकार में है और वे इस पर नजर बनाए हुए हैं।

वहीं, हिमाचल की राजनीति में ‘तीसरे मोर्चे’ की आहट पर उन्होंने सधे हुए अंदाज में कहा कि लोकतंत्र में संभावनाओं के द्वार हमेशा खुले रहते हैं। प्रदेश ने पहले भी ऐसे प्रयोग देखे हैं और भविष्य में भी इससे इनकार नहीं किया जा सकता।

रोबोटिक सर्जरी के फायदे

इस नई शुरुआत से मरीजों को कई बड़े लाभ मिलेंगे। सर्जरी के दौरान शरीर पर बहुत छोटे चीरे लगेंगे। खून की कमी कम होगी और रिकवरी की रफ्तार तेज होगी। डॉक्टरों को जटिल ऑपरेशन में अधिक सटीकता मिलेगी।

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