ऑनलाइन न्यूज नेटवर्क (ONN)

हिमाचल प्रदेश में बेलगाम हो रहे साइबर अपराधियों पर नकेल कसने के लिए पुलिस विभाग ने अपनी रणनीति में बड़ा बदलाव किया है। प्रदेश में बढ़ते ऑनलाइन फ्रॉड के मामलों को देखते हुए पुलिस ने अब जांच के तौर-तरीकों को पूरी तरह बदल दिया है। नई व्यवस्था के तहत अब ठगी की रकम तय करेगी कि आपकी फाइल किस थाने में खुलेगी।

2 श्रेणियों में बांटे साइबर ठगी के मामले
साइबर क्राइम के आईजी रोहित मालपानी ने नई व्यवस्था का खुलासा करते हुए बताया कि अब साइबर ठगी के मामलों को दो श्रेणियों में बांटा गया है। यदि आपके साथ हुई धोखाधड़ी की रकम 20 लाख रुपए से कम है, तो आपको साइबर थाने के चक्कर नहीं काटने होंगे। इसकी जांच अब संबंधित जिला पुलिस द्वारा ही की जाएगी। जिला पुलिस को इसके लिए विशेष ट्रेनिंग दी गई है ताकि पीड़ितों को तुरंत राहत मिल सके। यदि मामला 20 लाख रुपए से ऊपर का है, तो इसकी एफआईआर राज्य साइबर थाने में दर्ज होगी। चूंकि बड़े मामलों के तार अक्सर अंतर्राष्ट्रीय गिरोहों से जुड़े होते हैं, इसलिए इनकी जांच विशेषज्ञ टीम और उन्नत तकनीक के जरिए की जाएगी।
क्यों पड़ी बदलाव की जरूरत?
पिछले कुछ समय में हिमाचल में ठगी के नए-नए तरीके सामने आए हैं, कभी केवाईसी अपडेट के नाम पर, कभी लोन तो कभी फर्जी लिंक भेजकर खातों में सेंधमारी की जा रही है। हजारों से लेकर लाखों रुपए मिनटों में गायब हो रहे हैं। शिकायतों का अंबार लगने से जांच प्रक्रिया धीमी हो रही थी। पुलिस का मानना है कि इस विकेंद्रीकरण से जांच की रफ़्तार बढ़ेगी और पीड़ितों को लंबी प्रक्रियाओं में नहीं उलझना पड़ेगा।
ठगी का शिकार हो जाएं तो 1930 पर करें कॉल
पुलिस ने सख्त लहजे में आम जनता को सतर्क किया है। किसी भी अनजान लिंक, लॉटरी या बैंक अधिकारी बनकर आने वाले कॉल पर भरोसा न करें। यदि ठगी हो जाए तुरंत नैशनल साइबर हैल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें। समय रहते शिकायत करने पर आपकी गाढ़ी कमाई वापस मिल सकती है।
