Monday, March 9, 2026
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Himachal: तिरंगे में लिपटे पिता को देख जो सजाया था सपना.. आज बेटी ने किया पूरा, अब बनीं लेफ्टिनेंट

ऑनलाइन न्यूज नेटवर्क (ONN)

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हिमाचल प्रदेश की मिट्टी में ‘वीरता’ का बीज किस कदर गहरा बोया गया है, इसका जीवंत उदाहरण पालमपुर की आभा ने पेश किया है। यह कहानी केवल एक सैन्य अधिकारी बनने की नहीं है, बल्कि उस संकल्प की है जो एक ढाई साल की बच्ची के मन में तब उपजा था, जब उसने अपने पिता के तिरंगे में लिपटे पार्थिव शरीर को देखा होगा। आज वही आभा, भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट बनकर अपने पिता की विरासत को नई ऊंचाइयों पर ले गई हैं।

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विरासत में मिली जांबाजी

पालमपुर के कंडबाड़ी गाँव की आभा के रगों में सेना का अनुशासन पीढ़ियों से दौड़ रहा है। उनके दादा ने देश की सेवा की और पिता, नायक जीत सिंह (मेहर रेजिमेंट) ने साल 2003 में कश्मीर के अनंतनाग में आतंकियों से लोहा लेते हुए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया था। पिता की बहादुरी के लिए उन्हें मरणोपरांत ‘सेना मेडल’ से नवाजा गया था। आभा ने उस पिता को तस्वीरों और किस्सों में जिया और अंततः उन्हीं के पदचिन्हों पर चलने का फैसला किया।

सॉफ्टवेयर इंजीनियर से ‘लेफ्टिनेंट’ तक का सफर

आभा की यात्रा केवल जज्बे की नहीं बल्कि काबिलियत की भी मिसाल है। बनूरी के क्रिसेंट पब्लिक स्कूल से स्कूली शिक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने NIT हमीरपुर जैसी प्रतिष्ठित संस्थान से इंजीनियरिंग की। इंजीनियरिंग के बाद उन्हें बेंगलुरु की एक नामी सॉफ्टवेयर कंपनी में शानदार पैकेज पर नौकरी मिली।

कॉर्पोरेट की चकाचौंध उन्हें पिता के सपनों से दूर नहीं कर पाई। महज एक महीने की नौकरी के बाद उन्होंने इस्तीफा दिया और शॉर्ट सर्विस सिलेक्शन के जरिए सेना का रास्ता चुना।यू

7 मार्च को हुई पासिंग आउट परेड में जब आभा के कंधों पर सितारे सजे, तो वहां मौजूद उनकी मां की आंखों में गर्व के आंसू और चेहरे पर एक विजेता की मुस्कान थी।

‘वीरों की धरा’ का मान बढ़ाया

पालमपुर की यह भूमि कैप्टन विक्रम बत्रा और कैप्टन सौरभ कालिया जैसे महानायकों की जन्मस्थली रही है। आभा ने इस सूची में एक नया अध्याय जोड़कर यह सिद्ध कर दिया है कि देवभूमि की बेटियाँ भी युद्ध क्षेत्र में नेतृत्व करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।

मुख्यमंत्री ने थपथपाई पीठ

हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने आभा की इस उपलब्धि को पूरे प्रदेश के लिए प्रेरणा बताया है। उन्होंने कहा कि शहीद नायक जीत सिंह की पुत्री ने न केवल अपने परिवार की परंपरा को जीवित रखा है, बल्कि पूरे हिमाचल का सर गर्व से ऊंचा कर दिया है।

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