ऑनलाइन न्यूज नेटवर्क (ONN)
हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर में वन माफिया के दुस्साहस और वन विभाग की मुस्तैदी की एक रोमांचक कहानी सामने आई है। यहाँ अपनी ड्यूटी निभा रहे जांबाज वनकर्मियों को माफिया ने कुचलने की कोशिश की, लेकिन टीम के हौसले के आगे तस्करों की चाल नाकाम रही।
आधी रात को ‘फिल्मी’ स्टाइल में पीछा:
बिलासपुर सदर की वन विभाग टीम को बुधवार की रात एक खुफिया इनपुट मिला कि झलेड़ा (कुड्डी क्षेत्र) के जंगलों में ‘सफेद सोने’ यानी खैर की लकड़ी पर कुल्हाड़ी चलाई जा रही है। सूचना मिलते ही विभाग की टीम सतर्क हो गई और इलाके में जाल बिछाया गया। अंधेरे का फायदा उठाकर तस्कर एक पिकअप गाड़ी में माल भरकर भागने की फिराक में थे।
मौत को मात देकर पकड़े तस्कर
जैसे ही टीम ने संदिग्ध पिकअप को रुकने का इशारा किया, चालक ने रुकने के बजाय गाड़ी की रफ्तार बढ़ा दी। खौफनाक मंजर तब बना जब तस्करों ने मौके पर मौजूद रेंज ऑफिसर समेत पांच कर्मियों पर गाड़ी चढ़ाने का प्रयास किया। विभाग के कर्मचारियों ने मुस्तैदी दिखाते हुए अपनी जान बचाई और तुरंत पीछा शुरू किया।
फोरलेन पर हाई-स्पीड चेज
तस्कर कंदरौर से होते हुए कीरतपुर-नेरचौक फोरलेन पर चंडीगढ़ की तरफ जाने लगे। लेकिन वन विभाग की टीम ने हार नहीं मानी और मंडी भराड़ी के पास घेराबंदी कर आखिर उस गाड़ी को दबोच ही लिया।
जब्ती और गिरफ्तारी का विवरण
जब पिकअप की तलाशी ली गई, तो विभाग की टीम दंग रह गई। गाड़ी के भीतर खैर की लकड़ी के 50 बड़े मोछे (लॉग) ठसाठस भरे हुए थे। पकड़े गए आरोपी अजय कुमार (बल्लू), मनीष कुमार (दड़ियाना) और मुकेश कुमार (दली) है। ये सभी बिलासपुर जिले के ही रहने वाले हैं।
कानूनी शिकंजा
इस जांबाज ऑपरेशन को अंजाम देने वाली टीम में ब्लॉक ऑफिसर सुरेंद्र, वन रक्षक जितेंद्र, रजनीश और अंकेश शामिल थे। रेंज ऑफिसर नरेंद्र सिंह ने पुष्टि की है कि आरोपियों के खिलाफ वन अधिनियम और हत्या के प्रयास जैसी गंभीर धाराओं के तहत पुलिस ने केस दर्ज कर लिया है। वाहन को जब्त कर लिया गया है और अब पुलिस मामले की अगली कड़ियों को जोड़ने में जुटी है।
