ऑनलाइन न्यूज नेटवर्क (ONN)
हिमाचल प्रदेश की सत्ता संभालने के बाद से मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू सरकार ने श्गुणात्मक शिक्षाश् के नाम पर प्रदेश के शैक्षणिक ढांचे में बड़े फेरबदल की मुहिम छेड़ रखी है। इसी कड़ी में राज्य सरकार ने अब 100 से कम छात्र संख्या वाले कॉलेजों और शून्य पंजीकरण वाले स्कूलों को लेकर एक और बड़ा निर्णय लिया है। इसके अलावा विलय किए जाने स्कूल कॉलेजों के छात्रों को यात्रा भत्ता देने की भी तैयारी की जा रही है।
चौथे साल भी जारी है संस्थानों को बंद करने का सिलसिला
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार अपने कार्यकाल के चौथे वर्ष में भी संस्थानों के युक्तिकरण की नीति पर आक्रामक ढंग से काम कर रही है। सत्ता में आने के बाद से अब तक 1,000 से अधिक स्कूल और कॉलेजों को बंद या डिनोटिफाई किया जा चुका है। अब एक बार फिर सरकार ने लगभग 50 से अधिक शैक्षणिक संस्थानों को बंद करने या उनके विलय की तैयारी पूरी कर ली है।
सरकार का तर्क है कि कम छात्र संख्या वाले संस्थानों में संसाधनों का प्रभावी उपयोग नहीं हो पा रहा है। इसी क्रम में 100 से कम नामांकन वाले कॉलेजों के विलय का प्रस्ताव तैयार कर कैबिनेट की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। शिक्षा विभाग के आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में पांच कॉलेज ऐसे हैं, जहां छात्र संख्या 40 से भी कम है, जबकि 16 कॉलेजों में 100 से कम विद्यार्थी अध्ययनरत हैं।
शून्य नामांकन वाले स्कूल होंगे बंद
राज्य सरकार पहले ही 39 ऐसे स्कूलों को बंद करने के आदेश जारी कर चुकी है, जहां विद्यार्थियों का पंजीकरण शून्य था। इन स्कूलों के शिक्षकों और अन्य कर्मचारियों को नजदीकी विद्यालयों में समायोजित किया जाएगा। हाल ही में 39 छात्र और छात्रा विद्यालयों को मिलाकर सह.शिक्षा संस्थानों में बदला गया है।
सरकार ने यह भी घोषणा की है कि जिन विद्यार्थियों को दो किलोमीटर से अधिक दूरी तय करनी पड़ती है, उन्हें परिवहन भत्ता दिया जाएगा। सरकार का दावा है कि संस्थानों के एकीकरण के बाद विद्यार्थियों की पढ़ाई बाधित न हो, इसके लिए यह कदम उठाया गया है।
21 कालेजों में 100 से कम विद्यार्थी
शिक्षा विभाग के अनुसार, प्रदेश में पांच कॉलेज ऐसे हैं जिनमें 40 से कम विद्यार्थी हैं, जबकि 16 कॉलेजों में 100 से कम विद्यार्थी पढ़ाई कर रहे हैं।
40 से कम विद्यार्थियों वाले कॉलेज
राजकीय महाविद्यालय टिक्कर, शिमला 6 विद्यार्थी
राजकीय महाविद्यालय भलेई, चंबा 19 विद्यार्थी
चंद्रधर गुलेरी राजकीय महाविद्यालय हरिपुर, कांगड़ा 32 विद्यार्थी
आर्यभट्ट राजकीय महाविद्यालय, संधोल 38 विद्यार्थी
राजकीय महाविद्यालय कुकमसेरी 40 विद्यार्थी
100 से कम विद्यार्थियों वाले प्रमुख कॉलेज
राजकीय महाविद्यालय कुपवी (शिमला), मुल्थान (कांगड़ा), ननखड़ी (शिमला), जयनगर (सोलन), कोटली (मंडी), थाची (मंडी), भराली (सिरमौर), रामशहर (सोलन), कुमारसैन (शिमला), चिंतपूर्णी (ऊना), श्री नैना देवी जी, रक्कड़ (कांगड़ा), चौकी मनियार (ऊना), सेनाहट (सिरमौर) सहित अन्य संस्थान शामिल हैं।
शिक्षक भर्ती में बड़ी राहत
सीबीएसई से संबद्ध सरकारी स्कूलों में शिक्षक भर्ती के लिए न्यूनतम आयु सीमा 23 वर्ष समाप्त कर दी गई है। सरकार का कहना है कि कई अभ्यर्थी कम उम्र में स्नातक या परास्नातक की डिग्री पूरी कर लेते हैं और वे भर्ती प्रक्रिया से बाहर हो रहे थे। अब गणित और अंग्रेजी सहित विभिन्न विषयों में भर्ती के लिए यह बाधा हटा दी गई है।
मार्च 2023 में सरकार ने पूर्व भाजपा शासनकाल में खोले गए 19 कॉलेजों को डिनोटिफाई किया था। 2022 में खोले गए 24 संस्थानों में से अधिकांश को बंद कर दिया गया था। कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में अब तक एक हजार से अधिक स्कूल और कॉलेजों को बंद या मर्ज किया जा चुका है। सरकार का कहना है कि इन सुधारों से न तो किसी कर्मचारी की नौकरी जाएगी और न ही व्यावसायिक पाठ्यक्रमों पर प्रतिकूल असर पड़ेगा।
