Thursday, February 19, 2026
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हिमाचल में लॉटरी की वापसी! 26 साल बाद फिर खुलेगा किस्मत का पिटारा, राजस्व बढ़ाने की तैयारी

ऑनलाइन न्यूज नेटवर्क (ONN)

भारी कर्ज और केंद्र से मिलने वाले राजस्व घाटा अनुदान (RDG) की कटौती से जूझ रही हिमाचल प्रदेश सरकार अब आय के नए स्रोत तलाश रही है। इसी कड़ी में प्रदेश में करीब ढाई दशक बाद फिर से सरकारी लॉटरी शुरू करने की तैयारी तेज हो गई है। राज्य सरकार को उम्मीद है कि इस कदम से सरकारी खजाने में सालाना 75 से 100 करोड़ रुपये का अतिरिक्त राजस्व जमा होगा।

मंत्रिमंडलीय उप-समिति करेगी नियमों का निर्धारण

लॉटरी के पारदर्शी संचालन और इसके नियम तय करने के लिए सरकार ने उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान की अध्यक्षता में एक मंत्रिमंडलीय उप-समिति का गठन किया है। इस समिति में कैबिनेट मंत्री अनिरुद्ध सिंह और राजेश धर्माणी को सदस्य के तौर पर शामिल किया गया है। समिति को एक माह के भीतर अपनी विस्तृत रिपोर्ट और निविदा दस्तावेज तैयार कर सरकार को सौंपने के निर्देश दिए गए हैं।

बजट सत्र में लाया जा सकता है विधेयक

सूत्रों के अनुसार, उप-समिति की रिपोर्ट के आधार पर आगामी 18 मार्च से शुरू होने वाले विधानसभा के बजट सत्र में लॉटरी संचालन से संबंधित एक नया विधेयक पेश किया जा सकता है। सदन से मंजूरी मिलने के बाद प्रदेश में लॉटरी की बिक्री आधिकारिक रूप से शुरू हो जाएगी।

1999 में धूमल सरकार ने लगाई थी रोक

हिमाचल में लॉटरी का इतिहास पुराना है, लेकिन वर्ष 1999 में तत्कालीन प्रेम कुमार धूमल सरकार ने इसके सामाजिक दुष्प्रभावों और युवाओं पर पड़ने वाले नकारात्मक असर को देखते हुए इसे पूरी तरह बंद कर दिया था। हालांकि, वर्तमान में 1.04 लाख करोड़ रुपये से अधिक के कर्ज के बोझ और केंद्र से कम होती वित्तीय सहायता के कारण सुक्खू सरकार ने इसे दोबारा शुरू करने का कड़ा फैसला लिया है।

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