Wednesday, February 4, 2026
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सिर से उठा माता-पिता का साया, चाचा-चाची बने ढाल; बेटी ने नर्सिंग ऑफिसर बन बढ़ाया मान

ऑनलाइन न्यूज नेटवर्क (ONN)

कहते हैं कि अगर इरादे मजबूत हों और मेहनत सच्ची हो, तो हालात चाहे जितने भी कठिन क्यों न हों, सफलता का रास्ता खुद-ब-खुद निकल आता है। जिला मंडी के उपमंडल सरकाघाट के छोटे से गांव जबोठ की रहने वाली पूनम शर्मा ने इस कहावत को अपने जीवन से सच कर दिखाया है।

पूनम ने नहीं मानी हार

विपरीत परिस्थितियों, पारिवारिक अभाव और लगातार संघर्षों के बावजूद पूनम ने हार नहीं मानी और नर्सिंग ऑफिसर बनकर न केवल अपने परिवार, बल्कि पूरे क्षेत्र का नाम रोशन किया है। पूनम की इस उपलब्धि से पूरे इलाके में खुशी का माहौल है।

ग्रामीणों के अनुसार पूनम शर्मा का जीवन शुरू से ही चुनौतियों से भरा रहा। उनके जन्म से पहले ही पिता का निधन हो गया था। इसके बाद उनकी मां स्वर्गीय पुष्पा देवी ने आंगनबाड़ी सहायिका के रूप में कार्य करते हुए पूरे परिवार की जिम्मेदारी संभाली।

माता-पिता का सिर से उठा साया

सीमित संसाधनों के बावजूद मां ने पूनम की पढ़ाई और संस्कारों में कोई कमी नहीं आने दी। लेकिन वर्ष 2021 में हृदय गति रुकने से मां का भी अचानक देहांत हो गया। मां-बाप दोनों का साया सिर से उठ जाने के बाद पूनम के सामने जीवन की सबसे बड़ी परीक्षा आ खड़ी हुई।

ऐसे समय में उनके चाचा सुरेंद्र शर्मा और चाची सुनीता शर्मा ने अभिभावक बनकर पूनम की जिम्मेदारी संभाली। उन्होंने पूनम को अपनी सगी बेटी से बढ़कर स्नेह दिया और हर मोड़ पर उसका मनोबल बढ़ाया।

पढ़ाई के जरिए गढ़ा भविष्य

पूनम शर्मा बताती हैं कि उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा राजकीय मिडिल स्कूल जबोठ से प्राप्त की। मिडिल तक की पढ़ाई गांव में पूरी करने के बाद आगे की शिक्षा के लिए उन्होंने सीनियर सेकेंडरी स्कूल पांवटा साहिब से 12वीं कक्षा उत्तीर्ण की। पढ़ाई के प्रति उनकी लगन शुरू से ही साफ दिखाई देती थी।

इसके बाद उन्होंने जोनल अस्पताल मंडी से GNM नर्सिंग की पढ़ाई पूरी की। नर्सिंग क्षेत्र में आगे बढ़ने के उद्देश्य से पूनम ने पोस्ट बेसिक BDC नर्सिंग की डिग्री नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एजुकेशन, PGIMR चंडीगढ़ से हासिल की। कठिन पाठ्यक्रम, सीमित साधन और मानसिक दबाव के बावजूद उन्होंने पढ़ाई में कभी ढील नहीं दी।

UPSC में देशभर में 582वीं रैंक

लगातार मेहनत का परिणाम तब सामने आया जब पूनम शर्मा ने UPSC द्वारा आयोजित ESIC नर्सिंग ऑफिसर परीक्षा में ऑल इंडिया रैंक 582 हासिल की। इस सफलता के साथ ही उन्होंने नर्सिंग ऑफिसर के पद पर चयन पाकर अपने संघर्षों को एक नई पहचान दी। परिवारजनों का कहना है कि यह उपलब्धि सिर्फ एक नौकरी नहीं, बल्कि उन तमाम कठिन दिनों की जीत है, जिनसे गुजरकर पूनम यहां तक पहुंची हैं।

पूनम शर्मा को ESIC मेडिकल कॉलेज, फरीदाबाद में नर्सिंग ऑफिसर के रूप में नियुक्ति मिली है। वहां वह मरीजों की सेवा के साथ-साथ अपने क्षेत्र की बेटियों के लिए प्रेरणा बनेंगी।

अपनी सफलता पर पूनम ने भावुक होते हुए कहा कि यह मुकाम उनके स्वर्गीय माता-पिता के आशीर्वाद और चाचा-चाची के त्याग, विश्वास और सहयोग के बिना संभव नहीं था। उन्होंने कहा कि परिवार ने हर मुश्किल घड़ी में उनका साथ दिया, जिससे वह कभी टूटने नहीं पाईं।

गांव में जश्न का माहौल

जैसे ही पूनम की सफलता की खबर गांव पहुंची, जबोठ, भांबला और सरकाघाट क्षेत्र में खुशी की लहर दौड़ गई। ग्रामीणों ने मिठाइयां बांटी और एक-दूसरे को बधाइयां दीं। लोगों का कहना है कि पूनम जैसी बेटियां पूरे समाज के लिए मिसाल हैं, जो यह साबित करती हैं कि हालात नहीं, हौसले इंसान का भविष्य तय करते हैं। पूनम शर्मा की कहानी आज उन तमाम युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो कठिन परिस्थितियों में भी अपने सपनों को सच करने का साहस रखते हैं।

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