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Tuesday, April 14, 2026

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परिवार के पहले सरकारी अफसर बने पारस, झटका 15वां रैंक- कम उम्र में ही चल बसी थी मां

ऑनलाइन न्यूज नेटवर्क (ONN)

मां की ममता सिर से उठ जाए, तो बचपन समय से पहले बड़ा हो जाता है। हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले के पारस गुप्ता ने भी बहुत कम उम्र में अपनी मां को खो दिया था, लेकिन टूटने के बजाय उन्होंने हालातों से लड़ना सीखा।

पारस ने सीखा हालातों से लड़ना

जिस खालीपन को मां की यादें छोड़ गईं, उसे पारस ने मेहनत, अनुशासन और सपनों से भर दिया। नेरचौक निवासी पारस गुप्ता ने यह साबित कर दिया है कि हालात चाहे कितने भी कठिन क्यों न हों, मजबूत इरादों और निरंतर मेहनत से हर मंजिल हासिल की जा सकती है।

पारस ने हिमाचल प्रदेश लोक सेवा आयोग (HPPSC) द्वारा आयोजित कृषि विकास अधिकारी (ADO) परीक्षा में 15वीं रैंक हासिल कर न केवल अपने परिवार बल्कि पूरे क्षेत्र का नाम रोशन किया है।

छोटी उम्र में छिन गई मां

पारस की सफलता की कहानी साधारण नहीं, बल्कि संघर्षों से होकर गुजरी एक प्रेरक यात्रा है। कम उम्र में ही उनकी माता स्वर्गीय अनीता गुप्ता का निधन हो गया था। मां का साया सिर से उठ जाने के बाद परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा।

ऐसे समय में पारस के पिता महेंद्र गुप्ता और दादी माया देवी ने हिम्मत नहीं हारी। दोनों ने पूरे समर्पण और त्याग के साथ पारस और उनके भाई का पालन-पोषण किया और उन्हें आगे बढ़ने के लिए हमेशा प्रेरित किया।

हालात को नहीं बनने दिया बाधा

पारस की प्रारंभिक शिक्षा अभिलाषी स्कूल नेरचौक में हुई। शुरू से ही पढ़ाई के प्रति उनका रुझान साफ नजर आने लगा था। कठिन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने कभी अपने लक्ष्य से नजर नहीं हटाई। आगे चलकर उन्होंने अभिलाषी विश्वविद्यालय से बीएससी एग्रीकल्चर की पढ़ाई पूरी की और इसके बाद कृषि के क्षेत्र में गहरी समझ विकसित करने के लिए एमएससी एग्रीकल्चर की डिग्री पालमपुर से हासिल की।

HPPSC की कृषि विकास अधिकारी परीक्षा को प्रदेश की कठिन परीक्षाओं में गिना जाता है, लेकिन पारस ने अपने पहले ही प्रयास में इस परीक्षा को उत्तीर्ण कर 15वीं रैंक हासिल की। यह उपलब्धि उनकी कड़ी मेहनत, अनुशासन और आत्मविश्वास को दर्शाती है। खास बात यह है कि पारस अपने परिवार के पहले राजपत्रित अधिकारी बने हैं, जिससे घर में खुशी का माहौल है।

परिवार और क्षेत्र में खुशी की लहर

पारस की सफलता की खबर मिलते ही नेरचौक और आसपास के क्षेत्र में खुशी की लहर दौड़ गई। रिश्तेदारों, दोस्तों और शुभचिंतकों ने उन्हें बधाइयां दीं। पिता महेंद्र गुप्ता की आंखों में बेटे की सफलता को लेकर गर्व और भावुकता साफ झलक रही थी, वहीं दादी माया देवी ने इसे अपने जीवन का सबसे बड़ा सुख बताया।

पारस गुप्ता की यह उपलब्धि उन युवाओं के लिए एक संदेश है, जो कठिन हालातों के कारण अपने सपनों को अधूरा छोड़ने का मन बना लेते हैं। उनका सफर बताता है कि अगर लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत सच्ची हो, तो कोई भी बाधा सफलता के रास्ते में दीवार नहीं बन सकती।

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