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Sunday, April 12, 2026

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Himachal: सरकार का एक और कठोर फैसला, चिट्टा तस्करी में संलिप्त मिले ताे नहीं लड़ पाएंगे पंचायती राज चुनाव

ऑनलाइन न्यूज नेटवर्क (ONN)

नशे के खिलाफ राज्य सरकार द्वारा चलाए जा रहे व्यापक अभियान के तहत सरकार ने एक और कठोर निर्णय ले लिया है। जो व्यक्ति चिट्टा तस्करी में संलिप्त पाया जाता है, वह अब पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव में लड़ने से महरूम हो जाएगा। इसके लिए राज्य सरकार की 19 जनवरी को होने वाली मंत्रिमंडल की बैठक में इस प्रस्ताव को लाया जाएगा। यही नहीं, जिन लोगों ने चिट्टे के कारोबार से संपत्तियां बनाई हैं, उन्हें नष्ट किया जाएगा और उसे पर बुलडोजर भी चलाया जाएगा। यह बात ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री अनिरुद्ध सिंह ने बुधवार को प्रैसवार्ता करते हुए कही।

चिट्टे के खिलाफ पंचायतों में हाेगा विशेष ग्रामसभाओं का आयोजन

अनिरुद्ध सिंह कहा कि राज्य सरकार चिट्टे को लेकर गंभीर है। उन्होंने कहा कि 21 और 22 जनवरी को प्रदेश की सभी 3577 पंचायतों में विशेष ग्रामसभाओं का आयोजन होगा, जिनमें चिट्टे की रोकथाम को लेकर रणनीति बनाई जाएगी और स्थानीय स्तर पर लोगों को इस अभियान से जोड़ा जाएगा। प्रदेश की 3577 पंचायतों में 264 पंचायतें बॉर्डर एरिया में आती हैं, जहां नशे का खतरा अधिक है। इन पंचायतों को अति संवेदनशील श्रेणी में रखते हुए यहां विशेष निगरानी और जागरूकता अभियान चलाया जाएगा। हर पंचायत में चिट्टे के खिलाफ समन्वय के लिए नजदीकी स्कूल के प्रिंसीपल को नोडल अधिकारी बनाया जाएगा।

चिट्टे से जुड़ी सूचना देने वालों ईनाम देगी सरकार

अनिरुद्ध सिंह ने कहा कि चिट्टे से जुड़ी सूचना देने वालों को प्रोत्साहित करने के लिए ईनाम की व्यवस्था भी शुरू कर दी गई है। उन्होंने कहा कि सूचना देने वाले की पहचान गोपनीय रखी जाएगी। कुछ लोगों को ईनाम मिलना शुरू हो गया है। उन्होंने कहा कि युवाओं को नशे से दूर रखने के लिए ग्रामीण विकास एवं पंचायतीराज विभाग पूरे राज्य में पंचायत स्तरीय खेल टूर्नामैंट आयोजित करेगा। इसके बाद जिला और राज्य स्तरीय प्रतियोगिताएं करवाई जाएंगी। राज्य स्तरीय टूर्नामैंट में 21-21 लाख रुपए की ईनामी राशि रखी गई है। ये खेल प्रतियोगिताएं फरवरी के पहले सप्ताह से शुरू होंगी।

सरकारी कर्मचारियों पर भी नजर, अपनाई जा रही जीरो टॉलरैंस नीति

अनिरुद्ध सिंह ने स्पष्ट किया कि सरकार की चिट्टे के प्रति जीरो टॉलरैंस नीति है। उन्होंने कहा कि कौन से सरकारी अधिकारी और कर्मचारी नशे का सेवन कर रहे हैं या इसके कारोबार में संलिप्त हैं, इसका डाटा सभी विभागों से आ चुका है। ऐसे लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने कहा कि यदि हर पंचायत, हर परिवार और हर व्यक्ति इस लड़ाई में साथ देगा, तभी हिमाचल को नशे की इस बीमारी से मुक्त किया जा सकेगा।

विक्रमादित्य सिंह के बयान को बताया दुर्भाग्यपूर्ण

मंत्री विक्रमादित्य सिंह के बयान को अनिरुद्ध सिंह ने दुर्भाग्यपूर्ण करार दिया है। उन्होंने कहा कि अधिकारियों से काम करवाने आने चाहिए। कोई भी अधिकारी लीगल कार्य करने से इंकार नहीं करते। इस तरह अधिकारियों के खिलाफ बयान देने से अधिकारियों का मनोबल टूटता है। अनिरुद्ध सिंह ने कहा कि प्रदेश में ज्यादातर अधिकारी बाहरी राज्यों से ही हैं और उन्हें ऐसा नहीं लगता कि कोई अधिकारी किसी तरह की परेशानी कर रहा है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में कोई भी अधिकारी लीगल काम को तो नहीं रोकते।

 

 

 

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