ऑनलाइन न्यूज नेटवर्क (ONN)
हिमाचल प्रदेश में अब पुलिस की वर्दी पहनकर सीधे बस में चढ़ने और सीट लेने का पुराना तरीका बदलने वाला है। सरकार ने पुलिस महकमे के यात्रा प्रोटोकॉल को पूरी तरह डिजिटल और पारदर्शी बनाने का फैसला किया है। अब कांस्टेबल से लेकर इंस्पेक्टर रैंक तक के अधिकारियों की बस यात्रा तभी मान्य होगी, जब उनके पास ‘हिम बस कार्ड’ होगा।
क्या है नई व्यवस्था और क्यों?
डिजिटल पहचान: लगभग 15,000 पुलिसकर्मियों को अब अपनी यात्रा के लिए इस विशेष कार्ड का उपयोग करना होगा। यह कार्ड एक तरह का डिजिटल पास होगा, जो यह सुनिश्चित करेगा कि विभाग द्वारा दी जा रही सुविधा का लाभ केवल वास्तविक हकदार ही उठा रहे हैं।
नहीं है ‘फ्री’ राइड: अक्सर लोग इसे मुफ्त सुविधा समझते हैं, लेकिन वास्तविकता यह है कि पुलिसकर्मियों के वेतन से हर महीने ₹600 की कटौती की जाती है, जो विभाग के जरिए एचआरटीसी (HRTC) के खाते में जाती है। नया कार्ड सिस्टम इसी लेन-देन को और अधिक सटीक बनाएगा।
आवेदन की प्रक्रिया: पुलिसकर्मियों को डिपो के चक्कर काटने की जरूरत नहीं है। वे buspassonline.hrtchp.com पर जाकर घर बैठे आवेदन कर सकते हैं। इसके लिए बस एक पासपोर्ट फोटो और विभागीय पहचान पत्र की स्कैन कॉपी अपलोड करनी होगी।
समय सीमा: 31 जनवरी तक सभी कर्मियों को यह प्रक्रिया पूरी करनी होगी। 1 फरवरी से बिना कार्ड के यात्रा करने पर सख्ती बरती जा सकती है।
सड़कों पर बढ़ेगी इलेक्ट्रिक रफ्तार:
देवभूमि की वादियों में अब शोर कम और शांति ज्यादा होगी। हिमाचल प्रदेश सरकार ने राज्य को ‘ग्रीन स्टेट’ बनाने की दिशा में अपने कदम तेज कर दिए हैं। प्रदेश में इलेक्ट्रिक वाहनों (EVs) को ऊर्जा देने के लिए अब बड़े पैमाने पर इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया जा रहा है।
इलेक्ट्रिक क्रांति के मुख्य बिंदु:
पहले चरण का आगाज: बस अड्डा विकास प्राधिकरण ने पहले फेज में ₹20 करोड़ की लागत से 34 चार्जिंग स्टेशनों पर निर्माण कार्य शुरू कर दिया है। यह पूरे प्रदेश में बनने वाले 80 स्टेशनों की श्रृंखला की पहली कड़ी है।
नाबार्ड का बड़ा सहयोग: इस पूरी महत्वाकांक्षी योजना के लिए नाबार्ड (NABARD) ₹123 करोड़ की मदद दे रहा है। जैसे-जैसे सरकार से अगली किस्तें जारी होंगी, वैसे-वैसे शेष 46 स्टेशनों का काम भी गति पकड़ेगा।
सबके लिए सुविधा: ये चार्जिंग पॉइंट केवल सरकारी बसों के लिए नहीं होंगे, बल्कि निजी इलेक्ट्रिक वाहन मालिक भी इनका लाभ उठा सकेंगे। इससे राज्य में पर्यटन और निजी ई-वाहनों की संख्या में बढ़ोतरी होने की उम्मीद है।
प्रशासनिक सक्रियता: एचआरटीसी के प्रबंध निदेशक निपुण जिंदल के अनुसार, निर्माण कार्य युद्ध स्तर पर है ताकि जल्द से जल्द इलेक्ट्रिक बसों का बेड़ा और बेहतर तरीके से संचालित किया जा सके।
