ऑनलाइन न्यूज नेटवर्क (ONN)
हिमाचल प्रदेश सरकार ने आईजीएमसी शिमला (इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल) के सीनियर रेजिडेंट डॉक्टर डॉ. राघव नरूला की सेवाएं समाप्त करने के आदेश को निरस्त कर दिया है. यह निर्णय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग द्वारा 9 जनवरी 2026 को जारी आधिकारिक आदेश में लिया गया है.
आदेश के अनुसार, 22 दिसंबर 2025 को मरीज और डॉक्टर के बीच हुए विवाद के बाद डॉ. राघव निरुला को निलंबित किया गया था और बाद में उनकी सेवाएं समाप्त कर दी गई थीं. इस मामले की पुनः जांच के लिए एक स्वतंत्र समिति गठित की गई, जिसने 2 जनवरी 2026 को अपनी रिपोर्ट सौंपी. जांच समिति ने पाया कि यह घटना दोनों पक्षों के बीच अचानक हुई बहस का परिणाम थी और यह एक अलग-थलग मामला था.
समिति ने यह भी माना कि डॉ. राघव निरुला की ओर से यह एक निर्णय में चूक थी, लेकिन उन्होंने बिना शर्त माफी मांगी और खेद व्यक्त किया. साथ ही, उनके खिलाफ पहले कोई शिकायत दर्ज नहीं थी. रिपोर्ट के आधार पर सरकार ने अनुशासनात्मक कार्रवाई की समीक्षा करते हुए उनकी बर्खास्तगी को रद्द कर दिया. हालांकि, आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि भविष्य में इस तरह की किसी भी घटना पर सख्त कार्रवाई की जाएगी. इस फैसले का डॉक्टर समुदाय ने स्वागत किया है और इसे न्यायसंगत, संवेदनशील और संतुलित प्रशासनिक निर्णय बताया है.
बता दें कि 22 दिसंबर को आईजीएमसी शिमला में रेजिडेंट डॉक्टर राघव नरूला और मरीज अर्जुन के बीच किसी बात पर कहासुनी हुई, जिसके बाद दोनों के बीच जमकर मारपीट हुई. मारपीट का वीडियो वायरल होने पर पहले आरोपी डॉक्टर को सस्पेंड किया गया, फिर मामला तूल पकड़ता देख सरकार ने डॉक्टर नरूला की सेवाएं समाप्त कर दी. जिससे नाराज डॉक्टर हड़ताल पर चले गए.
आईजीएमसी शिमला के अलावा प्रदेशभर के डॉक्टरों और मेडिकल एसोसिएशन डॉ. राघव नरूला का समर्थन किया और सुक्खू सरकार से उनकी बर्खास्तगी वापस लेने की मांग की. देशभर की मीडिया में आईजीएमसी की घटना सुर्खियां बनी. हालांकि, बाद में आरोपी डॉक्टर राघव नरूला और मरीज अर्जुन पंवार ने मीडिया के सामने आकर सुलह कर ली. जिसके बाद मामला शांत हो गया.
