ऑनलाइन न्यूज़ नेटवर्क (ONN)
हिमाचल प्रदेश में पंचायत चुनाव को लेकर हाईकोर्ट ने अहम फैसला सुनाया है. हाईकोर्ट में लगातार तीन दिन तक हुई सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने अब सुक्खू सरकार को 30 अप्रैल से पहले पंचायत चुनाव करवाने के आदेश जारी किए हैं. कोर्ट ने कहा कि 28 फरवरी तक चुनाव आयोग और सरकार को प्रक्रिया तक पूरा करना होगा.
न्यायाधीश विवेक सिंह ठाकुर और जस्टिस रोमेश वर्मा की अदालत ने मामले की सुनवाई के दौरान शुक्रवार को कहा कि चुनाव आयोग और सरकार को 20 फरवरी से चुनाव प्रक्रिया शुरू करनी होगी. कोर्ट ने अपने आदेशों में चुनाव आयोग और राज्य सरकार को आपस में बैठकर चुनाव समय पर करवाने के लिए रणनीति बनाने के आदेश दिए. अदालत ने कहा कि सांविधानिक संस्थाओं को बनाए रखने के लिए चुनाव को अनिश्चितकाल तक स्थगित नहीं किया जा सकता है.
उधर, हाईकोर्ट में याचिका डालने वाले पक्ष के वकील नंद लाल ने बताया कि कोर्ट के आदेश है कि 30 अप्रैल से पहले चुनाव करवाने होंगे. कोर्ट ने सुनवाई के दौरान माना कि मार्च में स्कूलों में परीक्षाएं हैं और ऐसे में स्कूल में पोलिंग बूथ नहीं बनाए जा सकते हैं और एक महीने तक एग्जाम चलेंगे. ऐसे में 30 अप्रैल से पहले चुनाव करवाने होंगे.
हालांकि, सरकार ने चुनाव टालने के लिए कोर्ट में कई दलीलें दी और कहा कि चुनाव करवाने के लिए 6 महीना का वक्त चाहिए. उधर, राज्य चुनाव आयोग ने अपनी दलीलों में कहा कि आगे चुनाव करवाने में और दिक्कतें होंगी. अभी फरवरी औऱ मार्च में बोर्ड के एग्जाम होंगे और फिर मई के बाद कर्मचारियों की जनगणना में ड्यूटी लगेगी. बाद में जुलाई और अगस्त में मॉनसून सीजन में चुनाव करवाना संभव नहीं हो पाएगा. ऐसे में तीन दिन से चल रही सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने फैसला सुना लिया. इससे पहले, बुधवार को कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया था.
31 जनवरी को खत्म हो जाएगा कार्यकाल..
हिमाचल प्रदेश में पंचायत राज संस्थाओं का कार्यकाल 31 जनवरी 2026 को खत्म होना है. वहीं, 50 शहरी स्थानीय निकायों का कार्यकाल 18 जनवरी को खत्म हो जाएगा. प्रदेश में 3577 ग्राम पंचायतें, 90 पंचायत समितियों, 11 जिला परिषदों और 71 शहरी स्थानीय निकाय हैं. गौरतलब है कि चुनाव आयोग ने 19 नवंबर को कोड ऑफ कंडक्ट की धारा 2.1 के तहत आदेश जारी किए थे और नई पंचायतों के गठन और वार्डों के पुनर्सीमांकन पर रोक लगा दी थी.
सरकार ने आपदा का बहाना लेकर टाले चुनाव..
सुक्खू सरकार ने पंचायत चुनाव टालने के पीछे तर्क दिया था कि प्रदेश अब तक मॉनसून सीजन में आई आपदा से जूझ रहा है औऱ कई ग्रामीण इलाकों में अब भी सड़कें बंद हैं और ऐसे में चुनाव तय समय पर करवाना संभव नहीं है. विपक्ष लगातार सरकार पर इस मामले पर हमलवार था. गौर रहे कि प्रधानों का कार्याकल खत्म होने के बाद अब सरकार पंचायतों में प्रशासक नियुक्त करेगी.
