ऑनलाइन न्यूज़ नेटवर्क (ONN)
हिमाचल प्रदेश में पंचायत चुनाव को लेकर घमासान फिर से शुरू हो गया है. सुक्खू सरकार ने अपने फैसले पर यू-टर्न लिया है और अब हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में स्पेशल लीव पटीशन यानी एसएलपी दाखिल की है.
हालांकि, अभी मामला कोर्ट में लिस्ट नहीं हुआ है. भाजपा विधायक सुधीर शर्मा ने सोशल मीडिया पर यह जानकारी शेयर की है. गौरतलब है कि हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने सरकार को चुनाव करवाने के आदेश दिए थे और सरकार ने फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट ना जाने की बात कही थी.

दरअसल, 9 जनवरी को हिमाचल हाईकोर्ट ने सुक्खू सरकार को आदेश जारी किए थे कि 30 अप्रैल से पहले चुनाव करवाने के आदेश दिए थे. सरकार ने भी इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चैलेंज ना करने की बात कही थी. हालांकि, अब सरकार अपने फैसले पलट गई है.
भाजपा विधायक सुधीर शर्मा ने सोशल मीडिया पर लिखा कि सुप्रीम कोर्ट में हिमाचल प्रदेश पंचायती राज चुनावों पर रोक लगाने के लिए दायर एसएलपी को अगर देखें तो यह “सरकार बनाम सरकार” लग रहा है याचीकर्ता और रिसपोंडेंट्स की सूची को देखते ऐसा लगता है. चोरे दा गवाह मोर.
सरकार और चुनाव आय़ोग में घमासान..
हिमाचल प्रदेश में बीते दिसंबर और जनवरी महीने में पंचायत चुनाव होने थे. लेकिन सरकार ने इन्हें आपदा का बहाना बनाकर टाल दिया. दो महीने तक हाईकोर्ट में इसे लेकर सुनवाई होती रही. 31 जनवरी को पंचायतों का कार्यकाल खत्म हो गया है औऱ सरकार ने यहां पर प्रशासकों की नियुक्ति कर दी है. हालांकि, सरकार के इस फैसले का भाजपा विरोध भी कर रही है क्योंकि हिमाचल प्रदेश में ऐसा पहली बार हुआ है
मतदाता सूचियां ही नहीं की जारी..
गौरतलब है कि राज्य निर्वाचन आयोग ने 30 जनवरी तक सभी जिले के डीसी को मतदाता सूचियां रिलीज करने के आदेश दिए थे. लेकिन केवल तीन ही जिलों के डीसी ने यह काम किया. शिमला, चंबा और लाहुल स्पीति में ही मतदाता सूचियां अधिसूचित की गई हैं. आयोग ने आदेश दिए हैं कि 8 फरवरी तक चुनावों का आरक्षण रोस्टर जारी किया जाएगा. ऐसे में चुनाव तय समय पर करवाने पर संशय बना हुआ है.
