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Sunday, April 12, 2026

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Sirmaur: रेणुका जी बांध विस्थापित परिवारों का फूटा गुस्सा, कहा-17 साल बाद भी इंसाफ नहीं…अब हाेगी आर-पार की लड़ाई

ऑनलाइन न्यूज नेटवर्क (ONN)

बहुउद्देशीय श्री रेणुका जी बांध परियोजना से विस्थापित होने वाले सैकड़ों परिवारों का दर्द एक बार फिर जिला सिरमौर प्रशासन के सामने रखा गया है। श्री रेणुका जी बांध विस्थापित संघर्ष समिति ने डीसी सिरमौर प्रियंका वर्मा को ज्ञापन सौंपकर आरोप लगाया कि पिछले 17 वर्षों से विस्थापित परिवार पुनर्वास, पुनर्स्थापन और मुआवजे की मांग को लेकर संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन आज तक उनकी समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं हो पाया। समिति ने कहना है कि राष्ट्रहित के नाम पर उनकी पुश्तैनी जमीनें अधिग्रहित कर ली गईं, लेकिन बदले में विस्थापित परिवार आज भी खुद को ठगा-सा महसूस कर रहे हैं। समिति के अध्यक्ष विजय ठाकुर, महासचिव शुभम अत्री, कोषाध्यक्ष सुखचैन ठाकुर, प्रैस सचिव योगी ठाकुर, संयोजक विनोद ठाकुर सहित अन्य पदाधिकारियों व सदस्यों ने अब दो टूक शब्दों में कहा कि अब विस्थापित और नहीं सहेंगे। इससे पूर्व समिति के पदाधिकारियों, सदस्यों एवं विस्थापितों ने अपनी मांगों को लेकर डीसी कार्यालय परिसर में अपनी मांगों के समर्थन में नारेबाजी भी की।

300 परिवार विस्थापन की जद में, नीति जमीन पर बेअसर

समिति के अनुसार रेणुका जी बांध निर्माण के कारण लगभग 300 परिवार सीधे तौर पर विस्थापन की श्रेणी में आते हैं। इनमें से कई परिवार अपनी स्वेच्छा से एचपीपीसीएल की पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन योजना 5.2 के तहत अन्य स्थान पर घर बनाना चाहते हैं, जिसमें अधिकतम 28.5 लाख रुपए की अनुदान राशि देने का प्रावधान है। हालांकि, समिति ने स्पष्ट किया कि संपूर्ण परियोजना क्षेत्र पहाड़ी होने के कारण 150 वर्ग मीटर आधार क्षेत्र का एक मंजिला मकान बनाना अधिकांश परिवारों के लिए व्यावहारिक नहीं है, क्योंकि समतल भूमि की भारी कमी है और पहाड़ काटकर जमीन तैयार करने में अत्यधिक खर्च आता है, जो दी जा रही ग्रांट से कहीं अधिक है।

ज्ञापन में मांग की गई कि यदि कोई विस्थापित परिवार मजबूरी में बहुमंजिला मकान बनाता है, तो उसकी प्रत्येक मंज़िल के आधार क्षेत्र को जोड़ते हुए कुल 150 वर्ग मीटर आधार क्षेत्र माना जाए। उदाहरण देते हुए समिति ने कहा कि यदि कोई परिवार 80 वर्ग मीटर आधार क्षेत्र पर पहली मंज़िल और 70 वर्ग मीटर पर दूसरी मंजिल बनाता है, तो 80+70 को 150 वर्ग मीटर मानकर उसे पूरा लाभ दिया जाए। इसी प्रकार यदि कोई परिवार 50 वर्ग मीटर आधार क्षेत्र पर तीन मंजिला मकान बनाता है, तो 50×3 को 150 वर्ग मीटर के समकक्ष मानते हुए उसे पूरी 28.5 लाख रुपए की अनुदान राशि प्रदान की जाए।

ग्रांट और प्लॉट राशि वर्तमान दरों से बहुत कम

विस्थापितों ने ज्ञापन में यह भी मुद्दा उठाया कि गृहविहीन परिवारों को दी जाने वाली 27 लाख रुपए की हाऊसलैस ग्रांट वर्ष 2008 के मूल्यांकन पर आधारित है, जो वर्तमान समय में अत्यंत कम है। इसे पीडब्ल्यूडी शैड्यूल रेट के अनुसार पुनः आकलित कर बिना किसी शर्त के तुरंत जारी किया जाए। इसके साथ ही 250 वर्ग मीटर प्लॉट के लिए दी जा रही 1.50 लाख रुपए की राशि को भी बाजार मूल्य के अनुरूप बढ़ाने की मांग की गई।

भूमिहीन परिवारों के साथ हो रहा अन्याय

समिति ने आरोप लगाया कि भूमिहीन परिवारों की सूची प्रक्रिया वर्षों से लंबित है। कई परिवारों को अब तक भूमिहीन घोषित ही नहीं किया गया। वहीं एचपीपीसीएल द्वारा 4 स्थानों पर भूमिहीन परिवारों के लिए खरीदी गई भूमि को कृषि विभाग ने अनुपयुक्त घोषित किया है, जिससे विस्थापित उस भूमि पर अपना गुजर-बसर नहीं कर सकते। समिति ने मांग की कि ऐसी भूमि को निरस्त कर कृषि विभाग से प्रमाणित उपजाऊ भूमि अन्य स्थान पर उपलब्ध कराई जाए।

रेणुका जी बांध विस्थापितों की प्रमुख मांगें

विस्थापित संघर्ष समिति ने मांग की है कि एलएओ के अवार्ड के आधार पर सभी गृहविहीन परिवारों की सूची शीघ्र जारी की जाए और लंबे समय से बीओडी में लंबित सूचियों को तुरंत सार्वजनिक किया जाए। गृहविहीन परिवारों को मिलने वाली 27 लाख रुपए की ग्रांट को वर्तमान पीडब्ल्यूडी शैड्यूल रेट के अनुसार पुनः निर्धारित कर बिना शर्त जारी किया जाए। 250 वर्ग मीटर प्लॉट के लिए दी जा रही 1.50 लाख रुपए की राशि को वर्तमान बाजार मूल्य के अनुसार बढ़ाया जाए। समिति ने भूमिहीन परिवारों की सूची प्रक्रिया अविलंब शुरू करने, एचपीपीसीएल द्वारा खरीदी गई अनुपयुक्त भूमि को रद्द करने, कृषि योग्य भूमि का पुनः आवंटन करने और विस्थापितों को रोजगार में प्राथमिकता देने की मांग भी उठाई. इसके साथ ही सभी विस्थापितों को यह स्पष्ट जानकारी देने की मांग की गई कि उनकी भूमि, पेड़-पौधों और मकानों का मूल्य किस दर से लिया गया और परियोजना क्षेत्र में अधिग्रहित भूमि की दोबारा डिमार्केशन कर यह बताया जाए कि किस परिवार की कितनी भूमि अधिग्रहित हुई और कितनी शेष बची है।

आशा नहीं, पूरा विश्वास, लेकिन अब और इंतजार नहीं

विस्थापित संघर्ष समिति ने कहा कि उन्हें प्रशासन से केवल आशा ही नहीं, बल्कि पूरा विश्वास है कि उनकी जायज मांगों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय लिया जाएगा, साथ ही चेताया कि यदि अब भी विस्थापितों की समस्याओं की अनदेखी की गई तो वे आंदोलन को और तेज करने के लिए मजबूर होंगे।

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