Wednesday, February 4, 2026
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IAS-IPS एसोसिएशन को मंत्री विक्रमादित्य की दो टूक, बोले- पब्लिक सर्वेंट खुद को शासक न समझें

ऑनलाइन न्यूज नेटवर्क (ONN)

हिमाचल प्रदेश में अफसरशाही और सियासत के बीच चल रहा टकराव थमने का नाम नहीं ले रहा है. IAS और IPS एसोसिएशन की नाराजगी के बीच अब कैबिनेट मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने एक बार फिर साफ शब्दों में अपना पक्ष रखा है. उन्होंने कहा कि वे अपनी बात पर पूरी तरह अडिग हैं और किसी भी हाल में जनता के हितों से समझौता नहीं करेंगे. मंत्री ने दो टूक कहा कि उन्हें किसी सुरक्षा या विशेष व्यवस्था की जरूरत नहीं है, प्रदेश के लोगों का भरोसा ही उनकी सबसे बड़ी ताकत है.

मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने कहा कि वे संविधान के तहत हिमाचल में सेवाएं दे रहे सभी IAS और IPS अधिकारियों का दिल से सम्मान करते हैं. उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य किसी अधिकारी या संस्था को अपमानित करना नहीं है. लेकिन अगर कहीं सेवा भावना से समझौता होता दिखता है, तो एक जनप्रतिनिधि होने के नाते आवाज उठाना उनका दायित्व है. उन्होंने कहा कि जनता ने उन्हें इसी जिम्मेदारी के लिए चुना है.

मंत्री ने अधिकारियों को फिर चेताया

विक्रमादित्य सिंह ने सख्त शब्दों में कहा, “कोई भी पब्लिक सर्वेंट खुद को शासक समझने की गलती न करे. अगर ऐसा हुआ तो उन्हें समय-समय पर उनकी जिम्मेदारी जरूर याद दिलाई जाएगी. हर पद और संस्था की अपनी सीमा और जिम्मेदारी होती है. जब इन जिम्मेदारियों में ओवरलैपिंग होने लगती है, तब व्यवस्था के लिए खतरा पैदा होता है. उसी संदर्भ में उन्होंने पहले भी अपनी बात रखी थी और आज भी उसी पर कायम हैं.”

IAS और IPS एसोसिएशन की प्रतिक्रिया के बाद मंत्री ने सुरक्षा को लेकर भी बड़ा बयान दिया. उन्होंने कहा कि वे बिना किसी पुलिस सुरक्षा के भी रह सकते हैं. हिमाचल के लोग इतने कमजोर नहीं हैं कि उन्हें या किसी मंत्री को सुरक्षा की जरूरत पड़े. उन्होंने कहा कि अगर कोई उनकी सुरक्षा हटाना चाहता है, तो हटा सकता है. उन्हें किसी की जरूरत नहीं है, प्रदेश की जनता का प्यार और आशीर्वाद ही उनकी असली सुरक्षा है.

‘जनता के हितों से समझौता नहीं’

मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने साफ किया कि वे टकराव की राजनीति में विश्वास नहीं रखते. उम्र, पद और अनुभव में वे खुद को छोटा मानते हैं और सभी से सीखने की कोशिश करते हैं. लेकिन उन्होंने दोहराया कि जनता के हितों से किसी भी कीमत पर समझौता नहीं होगा. उन्होंने कहा कि भारत एक संघीय गणराज्य है, जहां हर संस्था और पद की जिम्मेदारी संविधान से तय होती है. जनप्रतिनिधियों का पहला और आखिरी उद्देश्य जनता की सेवा होना चाहिए.

मंत्री के इस बयान पर हुआ था विवाद

दरअसल, 12 जनवरी को मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने एक फेसबुक पोस्ट के जरिए कुछ बाहरी राज्यों से आए IAS और IPS अधिकारियों पर सवाल उठाए थे. उन्होंने लिखा था, “कुछ UP-बिहार के अधिकारी हिमाचल में हिमाचलियत की अनदेखी कर रहे हैं और उन्हें यहां की संवेदनाओं को समझने की जरूरत है.” उन्होंने यह भी कहा था कि हिमाचल के संसाधन प्रदेश के लोगों के हैं और उनके साथ किसी भी तरह की बंदरबांट बर्दाश्त नहीं की जाएगी. इसी पोस्ट के बाद IAS-IPS एसोसिएशन ने उनके इस बयान का विरोध किया था.

 

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